बुलडोजर न्याय असंवैधानिक है: सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख उद्धरण

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिए अपने एक फैसले में ‘बुलडोजर न्याय’ को लेकर गंभीर टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि कानून के शासन का पालन किए बिना इस तरह की कार्रवाइयां लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना उचित न्यायिक प्रक्रिया अपनाए किसी भी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या उसे ध्वस्त करना संविधान के अनुच्छेदों का उल्लंघन है।

यहाँ सुप्रीम कोर्ट के इस मुद्दे पर कुछ मुख्य उद्धरण दिए गए हैं:

  1. “बुलडोजर न्याय असंवैधानिक है”
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार कर, सीधे संपत्तियों को ध्वस्त करना असंवैधानिक है और इस पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए।
  2. “कानून के तहत प्रत्येक व्यक्ति को न्याय पाने का अधिकार है”
    कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि देश के संविधान के अनुसार हर नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है और प्रशासन को भी इसके तहत ही कार्रवाई करनी चाहिए।
  3. “न्यायिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक”
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी कार्रवाई से पहले न्यायिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है, और यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है कि संविधान और कानून का सम्मान हो।
  4. “लोकतंत्र में अनुशासन के साथ ही अधिकारों का भी संरक्षण जरूरी”
    कोर्ट ने प्रशासन से कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून और अनुशासन का पालन किया जाना चाहिए, और किसी के अधिकारों को अनदेखा करना अनुचित है।
  5. “संपत्ति का नुकसान सिर्फ न्यायिक आदेश के माध्यम से हो सकता है”
    कोर्ट ने निर्देश दिया कि किसी भी व्यक्ति की संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का अधिकार सिर्फ न्यायिक आदेश के माध्यम से ही किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणियां प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन हैं और यह सुनिश्चित करती हैं कि सभी कार्रवाइयाँ संविधान के दायरे में रहकर ही की जाएं।

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