ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की मदद करने वाले 10 साल के बच्चे की बहादुरी और सूझबूझ को अब देशभर में सराहा जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के एक संवेदनशील इलाके में जब सेना आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चला रही थी, तब इस बच्चे ने अपनी जान की परवाह किए बिना सैनिकों को महत्वपूर्ण सूचना देकर उनका मार्गदर्शन किया था।
सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, बच्चे ने न सिर्फ आतंकियों की गतिविधियों की सटीक जानकारी दी, बल्कि ऑपरेशन के दौरान सैनिकों को सुरक्षित रास्ता भी दिखाया। इसके चलते ऑपरेशन की सफलता में अहम योगदान मिला और कई जवानों की जान भी बच गई।
अब भारतीय सेना ने इस बच्चे की बहादुरी और सेवा भावना को सम्मानित करते हुए उसकी पूरी पढ़ाई का खर्च उठाने का ऐलान किया है। सेना की ओर से कहा गया है कि बच्चा जब तक पढ़ना चाहेगा, उसकी शिक्षा, यूनिफॉर्म, किताबें और रहने-खाने की सारी जिम्मेदारी सेना उठाएगी।
स्थानीय लोग और बच्चे के परिवार वाले इस फैसले से भावुक हैं। बच्चे के पिता ने कहा, “हम गर्व महसूस कर रहे हैं कि हमारे बेटे ने देश के लिए कुछ किया। सेना का ये कदम हमारे पूरे परिवार के लिए प्रेरणा है।”
इस बहादुर बच्चे को जल्द ही एक सैन्य सम्मान समारोह में औपचारिक रूप से सम्मानित भी किया जाएगा।
