अमित कुमार भागलपुर। – भारतीय शिक्षा समिति एवं शिशु शिक्षा प्रबंध समिति, बिहार के तत्वावधान में पंच परिवर्तन की दृष्टि से नारी में ज्ञानशक्ति, आत्मशक्ति, संगठनशक्ति, नेतृत्वशक्ति एवं राष्ट्रशक्ति को पुष्पित एवं पल्लवित करने के उद्देश्य से आज आनंदराम ढांढनियां सरस्वती विद्या मंदिर, भागलपुर के विशाल केशव सभागार में “सप्तशक्ति संगम” कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ तिलकामांझी की व्याख्याता एवं कार्यक्रम की अध्यक्षा प्रोफेसर डॉ. श्वेता पाठक, प्रांतीय संयोजिका श्रीमती अनीता सिन्हा, विभागीय वक्ता श्रीमती रश्मि पाठक और विभागीय वक्ता श्वेता सौरभ द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। आगंतुक अतिथियों का स्वागत अंग वस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। अतिथि परिचय श्रीमती सुजाता कुमारी ने कराया। कार्यक्रम की प्रस्तावना श्रीमती अनीता सिन्हा ने प्रस्तुत की।
कार्यक्रम की शुरुआत बहनों द्वारा प्रस्तुत समूह गीत “हम ही मातृ शक्ति हैं, हम ही आदि शक्ति हैं” से हुई, जिसने समस्त गतिविधियों में प्राणवायु फूंक दी। कुटुंब प्रबोधन श्रीमती श्वेता सौरभ ने प्रस्तुत किया। भारतीय संस्कृति पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का संचालन श्रीमती सुजाता कुमारी ने किया, जिसमें माताओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका पर शानदार प्रस्तुति श्रीमती रश्मि पाठक ने दी। इसके अतिरिक्त, सर्जना भारती ने प्रेरणादायी महिलाओं के संदेश साझा किए। विशिष्ट माताओं का सम्मान श्रीमती ममता झा के द्वारा किया गया। आगंतुक माताओं ने अपने अनुभव कथन साझा किए। आभार ज्ञापन श्रीमती अंजू श्री ने किया, जबकि संकल्प प्रस्तुत किया श्रीमती सुनंदा भट्टाचार्य ने और मंच संचालन श्रीमती श्वेता झा ने किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर डॉ. श्वेता पाठक ने कहा कि नारी शक्ति को सशक्त बनाने के लिए हमें अपनी संस्कृति और मूल्यों को समझना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि नारी शक्ति केवल घर तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
