बिलासपुर।
पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक में संशोधन और पत्रकारिता संरक्षण के मुद्दे पर देशभर के पत्रकार 2 नवंबर को न्यायधानी बिलासपुर में जुटेंगे। अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति (एबीपीएसएस) छत्तीसगढ़ इकाई द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन स्व. लखीराम अग्रवाल ऑडिटोरियम में किया जाएगा। इस दौरान छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से आए पत्रकारों को सम्मानित भी किया जाएगा।
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष जिग्नेश कालावाडिया (गुजरात) की सहमति से इस बार राष्ट्रीय अधिवेशन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ इकाई को दी गई है। जिग्नेश कालावाडिया ने बताया कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक लागू हुआ है, इसलिए राष्ट्रीय अधिवेशन यहीं आयोजित किया जा रहा है। इस अधिवेशन में देशभर से पत्रकार शामिल होंगे और अपने-अपने राज्यों में इस कानून को लागू करने की मांग करेंगे ताकि पत्रकार स्वतंत्र रूप से काम कर सकें।
समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में छत्तीसगढ़ के तीन वरिष्ठ पत्रकार — राकेश प्रताप सिंह परिहार, महफूज खान और नितिन सिन्हा शामिल हैं। उन्होंने वर्तमान पत्रकार सुरक्षा कानून को अधूरा बताते हुए इसमें संशोधन की मांग की है। अधिवेशन में पत्रकारिता संरक्षण और सुरक्षा कानून के संसोधन पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही राज्य सरकार को सुझाव भेजे जाएंगे कि किस तरह इस विधेयक में सुधार कर पत्रकारों को वास्तविक सुरक्षा दी जा सके।
एबीपीएसएस छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू मौजूद रहेंगे। वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में बिलासपुर विधायक एवं पूर्व केबिनेट मंत्री अमर अग्रवाल और कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव उपस्थित रहेंगे। ये जनप्रतिनिधि पत्रकारों और सरकार के बीच सेतु का कार्य करेंगे।
इसके अलावा, दिल्ली से वरिष्ठ पत्रकार सी. पी. जोशी, नागपुर से अविनाश काकड़े, साथ ही रायपुर प्रेस क्लब और बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्षों को भी विशेष आमंत्रित किया गया है। अधिवेशन में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से हजारों पत्रकारों के पहुंचने की संभावना है।
समिति ने सभी पत्रकारों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में इस संगोष्ठी में भाग लें और पत्रकार सुरक्षा कानून के संशोधन बिल को मजबूत बनाने के लिए एकजुट होकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाएं, ताकि पत्रकारिता को सच्चे अर्थों में स्वतंत्रता और सुरक्षा मिल सके।
