किशनगंज में 16 वर्षीय नाबालिग की शादी रोकी गई, प्रशासन और जन निर्माण केंद्र की संयुक्त कार्रवाई

ठाकुरगंज, किशनगंज।

सामाजिक कुप्रथा बाल विवाह के विरुद्ध एक साहसिक और सराहनीय कदम उठाते हुए किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत जिरनगच्छ पंचायत में शनिवार को एक 16 वर्षीय नाबालिग बालिका का विवाह प्रशासन और जन निर्माण केंद्र की संयुक्त कार्रवाई से समय रहते रोक दिया गया। इस हस्तक्षेप से एक मासूम बालिका का भविष्य सुरक्षित हो सका।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जन निर्माण केंद्र को स्थानीय स्रोतों से सूचना मिली थी कि गांव में एक नाबालिग किशोरी का विवाह तय किया गया है। सूचना की पुष्टि होते ही संस्था के जिला समन्वयक श्री मोहम्मद मुजाहिद आलम के नेतृत्व में टीम सक्रिय हुई। अनुमंडल पदाधिकारी-सह- बाल विवाह प्रतिषेध पदाधिकारी अनिकेत कुमार के निर्देशानुसार प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह- सहायक बाल विवाह प्रतिषेध पदाधिकारी अहमर अब्दाली एवं पुलिस प्रशासन के सहयोग से टीम विवाह स्थल पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।

मौके पर अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बालिका के परिजनों से संवाद किया और उन्हें बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की कानूनी धाराओं के साथ-साथ बाल विवाह से होने वाले मानसिक, शारीरिक और सामाजिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी। समझाइश के बाद परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए विवाह को स्थगित करने का निर्णय लिया और लिखित रूप में इसका प्रमाण भी दिया।

इस दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह- सहायक बाल विवाह प्रतिषेध पदाधिकारी अहमर अब्दाली ने बताया कि किसी भी नाबालिग की शादी करवाना, करना या इसमें किसी भी प्रकार की सहायता प्रदान करना गैर-जमानती कानूनी अपराध है। नाबालिग की शादी से शिक्षा के अधिकार, बच्चे के समग्र विकास, मानसिक क्षमता और समाज पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कानून के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए परिजनों ने विवाह रोकने पर सहमति जताई।

प्रशासन की ओर से परिजनों से एक शपथ पत्र भी भरवाया गया, जिसमें उन्होंने यह लिखित रूप से स्वीकार किया कि वे अपनी बेटी का विवाह 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद ही करेंगे।

इस कार्रवाई के दौरान जन निर्माण केंद्र के सामुदायिक सामाजिक कार्यकर्ता सबीह अनवर, रानी कुमारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं पुलिस बल मौजूद रहे। प्रशासन और सामाजिक संस्था की इस संयुक्त पहल की क्षेत्र में सराहना की जा रही है और इसे बाल विवाह उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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