किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत धर्म कांटा से बांसबाड़ी के बीच निर्माणाधीन बाईपास को लेकर आज बुरी डांगी के पास ग्रामीणों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि बाईपास सड़क को कब्रिस्तान के बाउंड्री से सटाकर बनाया जाए और उसके पश्चिमी हिस्से में पानी की निकासी के लिए नाला छोड़ा जाए, ताकि क्षेत्र में जलजमाव और भविष्य के विवादों से बचा जा सके।
ग्रामीणों के अनुसार बुरी डांगी एक नदी के रूप में जानी जाती है और पहले की तरह इसी नदी से पानी की प्राकृतिक निकासी होती रही है। यदि वर्तमान योजना के तहत कब्रिस्तान की ओर नाला बनाया गया, तो बरसात के दिनों में गंदा पानी, मृत पशु (कुत्ता, बकरी आदि) और अन्य अपशिष्ट बहकर कब्रिस्तान में जमा हो सकते हैं, जिससे सामाजिक और धार्मिक विवाद खड़े होने की आशंका है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि कब्रिस्तान के बाउंड्री से सटाकर बाईपास बनाने से किसी व्यक्ति को कोई परेशानी नहीं होगी। इसके विपरीत, यदि पश्चिम साइड में—जहां पहले से बुरी डांगी नदी मौजूद है—नाला बनाकर उसी से पानी की निकासी की जाए, तो बरसात में जलजमाव की समस्या भी नहीं होगी और कब्रिस्तान की पवित्रता भी बनी रहेगी।
राजद नेता मुस्ताक आलम ने इस मुद्दे पर कहा कि यदि कब्रिस्तान की ओर नाला बनाया गया तो भविष्य में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बरसात के समय गंदगी और अपशिष्ट कब्रिस्तान में पहुंचने से लगातार विवाद की स्थिति बनी रहेगी। इसे देखते हुए सभी ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि पानी की निकासी पहले की तरह बुरी डांगी नदी से ही की जाए।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पश्चिम साइड में बिहार सरकार की जमीन उपलब्ध है, जिससे बाईपास निर्माण के लिए भूमि की कोई कमी नहीं होगी। यदि नाला पश्चिमी हिस्से में बनाया जाता है, तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी और परियोजना भी सुचारू रूप से पूरी हो सकेगी।
फिलहाल ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी आपत्तियों और सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए बाईपास के नक्शे में आवश्यक संशोधन किया जाए, ताकि भविष्य में किसी तरह का सामाजिक या धार्मिक विवाद उत्पन्न न हो।
