गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र और खुदाई खिदमतगार भागलपुर के संयुक्त तत्वाधान में भारत रत्न सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान की पुण्यतिथि पर “सामाजिक समरसता और सीमांत गांधी “विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया ।

 

रिपोर्ट – अमरजीत कुमार तिवारी भागलपुर/बिहार ।।

इस अवसर पर समाज के कमजोर और असहाय लोगों को शाल और पुष्प माला प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संयोजन खुदाई खिदमतगार के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद शहबाज जी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र गुप्ता, मुख्य अतिथि डॉक्टर फारूक अली, पूर्व कुलपति जे पी विश्वविद्यालय छपरा, विशिष्ट अतिथि उदय जी,डॉक्टर हबीब मुर्शिद खान थे। कार्यक्रम का संचालन संजय कुमार और धन्यवाद ज्ञापन वासुदेव भाई द्वारा किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि सीमांत गांधी जो फ्रंटियर गांधी और बच्चा खानके नाम से जाना जाता है उनका पूरा नाम खान अब्दुल गफ्फार खान था। जिन्होंने खुदाई खिदमतगार नमक संस्था का गठन किया था, जिसका अर्थ ईश्वर का सेवक होता है। इसी भाव से उन्होंने महात्मा गांधी के साथ मिलकर स्वतंत्रता की लड़ाई में अपना संपूर्ण जीवन न्योछावर कर दिए। देश की आजादी के बाद जब भारत और पाकिस्तान द्विराष्ट्र की घोषणा की गई तो सीमांत गांधी ने इसका पुरजोर विरोध किया था। वह एक छत्र भारत के समर्थक थे। यही वजह है कि जब आजाद पाकिस्तान में वे गए तो वहां भी उन्हें संपूर्ण जीवन जेल में ही बिताना पड़ा।
देश और दुनिया के स्तर पर आज विचारों की लड़ाई जारी है, आजादी की लड़ाई में जहां सभी वर्ग,जाति, धर्म और समुदाय के लोगों ने मिलकर देश की आजादी की लड़ाई लड़ा ,उस आजादी के मूल्यों को आज खारिज करने की कोशिश हो रही है ।समता बादी विचार की जगह विषमतावादी विचार को धर्म के आड़ में फैलने का प्रयास किया जा रहा है । यह वैश्विक पूंजीवादी व्यवस्था और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की सोची समझी साजिश है।इसीलिए खान अब्दुल गफ्फार खान का यह विचार की इंसानियत की सेवा ही सच्ची सेवा है। इस बात को फैलाने की आवश्यकता है।
मुख्य अतिथि डॉक्टर फारूक अली ने कहा कि खान अब्दुल गफ्फार खान का त्याग,सेवा, समर्पण और सहिष्णुता सबको प्रेरित करता है। वे एक प्रेरणा के स्रोत थे, जिनके विचारों को आत्मसात करने की आवश्यकता है। प्रकाश चंद्र गुप्ता ने उन्हें मानवता का रक्षक बताया। उदय जी ने उन्हें निष्पक्ष और शांतिपूर्ण व्यक्तित्व का प्रतीक बताया। मोहम्मद शाहबाज ने कहा कि उनके विचार मानवीय विचार थे। जिन्होंने गरीब असहाय और कमजोर लोगों को ऊपर उठने के लिए अपने आप को समाज के अंतिम व्यक्ति के साथ जोड़ने का काम किया, हम उनके विचारों को लेकर समाज को जोड़ने और गरीबों के उत्थान में लगें यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इसीलिए प्रत्येक वर्ष समाज के दबे कुचले शोषित पीड़ित लोगों के सम्मान में वस्त्र वितरण का कार्यक्रम भी किया जाता है। कार्यक्रम के अंत में मोहम्मद इकराम हुसैन शाह जी द्वारा भावपूर्ण श्रद्धांजलि गीत गया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोगों में मोहम्मद शाहबाज, उदय ,प्रकाश चंद्र गुप्ता , हबीब मुर्शिद खान ,वासुदेव भाई, प्यारी देवी,संजय कुमार,फारूक आजम, मदन कुमार, विशाल कुमार ,अभिषेक कुमार,संजय कुमार ,मोहम्मद आलम, मोहम्मद कलाम ,मोहम्मद सलाम, यासमीन खातून ,अटारी मुस्कान ,शबनम,मलका आदि
उपस्थित थे।
निवेदक
संजय कुमार सहसचिव
गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र भागलपुर।

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