संवाददाता शुभम कुमार भागलपुर/बिहार
सन्हौला थाना क्षेत्र में 21 मई 1992 को हुए संझो दास हत्याकांड में नामजद अभियुक्त बहादुर दास को अदालत ने रिहा कर दिया है। यह मामला एडीजे-11 की अदालत में विचाराधीन था। डिफेंस लॉयर शशिकला ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में बहादुर दास को दोषमुक्त करार दिया है। गौरतलब है कि हत्याकांड के बाद से ही अभियुक्त बहादुर दास फरार चल रहा था। लंबे समय तक पुलिस उसे पकड़ने में असफल रही। करीब तीन दशक बाद, पिछले वर्ष बहादुर दास की गिरफ्तारी हुई, जिसके बाद मामले की सुनवाई दोबारा शुरू की गई। अभियोजन पक्ष की ओर से कई गवाह पेश किए गए, वहीं बचाव पक्ष ने भी अपने तर्क और साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। गवाहों के बयानों में विरोधाभास और ठोस साक्ष्यों की कमी को ध्यान में रखते हुए न्यायाधीश ने अभियुक्त को रिहा करने का आदेश दिया। अदालत के फैसले के बाद बहादुर दास को तत्काल जेल से मुक्त कर दिया गया। इस निर्णय के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है, वहीं पीड़ित पक्ष की ओर से निराशा व्यक्त की जा रही है। मामले का फैसला लगभग 33 वर्षों बाद सामने आने से न्यायिक प्रक्रिया की लंबी अवधि पर भी सवाल उठ रहे हैं।
