अंगिका अंगवासियों की मौलिक भाषा”:डॉ. डी.पी.सिंह ” विभिन्न विधाओं से जुड़ी हस्तियां कर्ण राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित”

 

संवाददाता शुभम कुमार भागलपुर/बिहार

अंगिका अंगवासियों की मौलिक भाषा है। अंगवासियों की पीड़ा अंगिकाभाषी ही समझ सकते हैं। उक्त बातें शहर के जाने-माने चिकित्सक डॉ. डी.पी.सिंह ने रविवार को स्थानीय गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र में युग चेतना फाउंडेशन,अंग-जन-गण,अंग मदद फाउंडेशन और अंगिका सभा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में विश्व मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित अंग अंगिका साहित्य महोत्सव दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान समारोह में कही। उन्होंने कहा कि कोई भी विद्या जाति से नहीं गुण से सम्मान पाती है। दानवीर कर्ण को ज्ञान का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि जहां भी संभव हो अंगिका में ही बात करें, तभी हमारी यह मातृभाषा सम्मानित होगी। इस अवसर पर समाजसेवी डॉ.शंभू दयाल खेतान ने कहा कि विश्वविद्यालयों में अंगिका की पढ़ाई हो रही है, इस विषय में शोध भी हो रहा है, हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि निश्चित रूप से अंगिका को प्रतिष्ठित सम्मान मिलेगा।
अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रो. डॉ. रतन कुमार मंडल ने दानवीर कर्ण को अंग क्षेत्र का गौरव बताते हुए कहा कि अधिक-से-अधिक अंगिका में ही बात करें और अंगिका का व्यापक प्रचार-प्रसार करें, तभी अंगिका का अस्तित्व बचेगा। उन्होंने इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से भी संसद और विधानसभाओं में इसके लिए आवाज उठाने की अपील की। इस अवसर पर डॉ. मनोज मीता ने कहा कि जब तक सभी मिलजुल कर अंगिका को सम्मान दिलाने के लिए आगे नहीं बढ़ेंगे, तब तक इसका विकास नहीं हो सकेगा। डॉ. मीरा झा ने कहा कि अंगिका विकास के लिए और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। डॉ.रमेश आत्मविश्वास ने अंगिका को समृद्ध भाषा बताते हुए कहा कि इसे अपना भाषा-सिद्धांत है। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार रंजन कुमार ने इस बात पर चिंता जताई की लोग अंगिका को मातृभाषा समझते ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जनगणना में अपनी मातृभाषा अंगिका ही लिखाएं तभी सरकारी आंकड़ों में अंगिकाभाषियों की संख्या बढ़ेगी और अंगिका को भाषायी कोड मिलेगा।
कार्यक्रम में विभिन्न विधाओं से जुड़ी प्रसिद्ध हस्तियों को दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में रंगकर्मी डॉ. चैतन्य प्रकाश, नाटककार व साहित्यकार सत्य नारायण मंडल,प्रीतम विश्वकर्मा,प्रकाश चंद्र,आभा पूर्वे,डा.शोभा कुमारी,सरयुग पंडित सौम्य,अजय साहू आदि शामिल हैं। इस अवसर पर डॉक्टर अमरेंद्र द्वारा संपादित पत्रिका “आंगी”,डॉ. सुधीर मंडल और डॉ. माखन प्रसाद शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक “गांधी दर्शन और विचार” प्रदीप राय की पुस्तक “गांधी जी का ग्राम स्वराज”और कर्ण पुरस्कार से संबंधित स्मारिका का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन पत्रकार व समाजसेवी प्रसून लतांत ने किया। आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए अंग-जन-गण के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुधीर मंडल ने अंगिका विकास के लिए राष्ट्रीय स्तर किये गए अपने प्रयासों की चर्चा की। युग चेतना फाउंडेशन के निदेशक शिवनंदन खेतान ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अमरेंद्र,डॉ.ब्रह्मदेव कुमार आदि उपस्थित थे। कर्ण की भूमिका में आए हीरो राजन कुमार आकर्षण का केंद्र रहे।
सम्मान समारोह के दूसरे सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन का संचालन वरिष्ठ कवि राजकुमार ने किया। कवि सम्मेलन में मनीष कुमार गूंज,सरयुग पंडित,प्रीतम विश्वकर्मा,डा.श्वेता भारती, अभय कुमार भारती, डा.ब्रह्मदेव मंडल,पारस कुंज,त्रिलोकीनाथ दिवाकर,डा. विकास सोलंकी, सुजीत कुमार, सत्य नारायण मंडल आदि ने काव्य पाठ किया।

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