रिपोर्ट – अमित कुमार, भागलपुर।
भागलपुर (बिहार) से लगभग 105 किलोमीटर की दूरी तय कर पत्रकार अमित कुमार पहुँचे झारखंड राज्य के दुमका जिले के अंतर्गत जरमुंडी प्रखंड स्थित बाबा बासुकीनाथ धाम, जिसे पौराणिक मान्यताओं में अत्यंत पवित्र और चमत्कारिक देवभूमि माना गया है।
कथाओं के अनुसार, बाबा बासुकीनाथ नाग के रूप में अवतरित हुए थे। जब समुद्र मंथन के समय देवताओं और दानवों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ, तब मथने के लिए मंदार पर्वत का प्रयोग किया गया और बासुकी नाग को रस्सी के रूप में बुलाया गया। इसी समुद्र मंथन से अमृत और विष की उत्पत्ति हुई।
किंवदंती यह भी है कि मंथन के पश्चात बासुकी नाग अपने निवास दारुकवन लौटे, जहाँ उन्होंने दारुक नामक राक्षस का वध किया। इसी कारण इस स्थान की पहचान “फौजदारी बाबा” के रूप में हुई — क्योंकि श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहाँ प्रार्थना करने से शीघ्र न्याय मिलता है और कार्य सिद्ध होते हैं।
मंदिर के दक्षिण दिशा में माँ काली मंदिर और श्मशान घाट स्थित है, जहाँ साधक औघड़ सिद्धि प्राप्त करते हैं। बाबा मंदिर के सामने शिवगंगा घाट है, जिसके जल को “पाताल बाबा बासुकीनाथ” से जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि इस घाट का पानी हरितवर्ण (हरा रंग) का होता है, लेकिन स्नान के समय यह पूर्णतः स्वच्छ हो जाता है। श्रद्धालु यहाँ दंड-बैठक कर पूजा अर्चना के बाद जलाभिषेक करते हैं।
यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या विशेषकर सावन माह में अत्यधिक बढ़ जाती है। इस अवधि में दूर-दूर से भक्त बाबा बासुकीनाथ को जल अर्पण करने पहुँचते हैं।
यह स्थल सड़क और रेल दोनों मार्गों से सुलभ है। रेल मार्ग से आने पर नोनीहाट जंक्शन पर उतरकर टोटो या निजी वाहन द्वारा लगभग ₹50 के किराए में बाबा बासुकीनाथ मंदिर पहुँचा जा सकता है।
