संवाददाता शुभम कुमार, भागलपुर।
भागलपुर के जवारीपुर मोहल्ले स्थित वृंदावन हॉल में “फुले-अंबेडकर जागृति संघ” के बैनर तले बहुजन-एकता-सम्मेलन का आयोजन बड़े हर्षोल्लास के साथ किया गया। इस अवसर पर पेरियार ललई सिंह यादव की जयंती और भारत लेनिन अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा का शहादत दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. डॉ. योगेंद्र ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. क्षमेन्द्र कुमार सिंह, डॉ. आर.पी.सी. वर्मा एवं डॉ. फारूक अली उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि में डॉ. वीणा यादव, डॉ. मोहन पासवान और डॉ. विलक्षण बौद्ध शामिल हुए। सम्मेलन का उद्घाटन वरिष्ठ समाजसेवी गणेश दत्त कुशवाहा ने किया।
स्वागताध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार ने मंचासीन अतिथियों और उपस्थित श्रोताओं का अभिनंदन करते हुए बहुजन एकता को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जाति-धर्म से ऊपर उठकर बहुजनों को एक सूत्र में बंधे रहना होगा। उद्घाटनकर्ता गणेश दत्त कुशवाहा ने पेरियार ललई सिंह यादव और बाबू जगदेव प्रसाद के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की।
डॉ. क्षमेन्द्र कुमार सिंह ने शिक्षा की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा जीवन की हर समस्या का समाधान है। वहीं, संघ के अध्यक्ष डॉ. सतीश कुमार ने महापुरुषों के विचार आत्मसात करने और शिक्षा के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “शिक्षा शेरनी का वह दूध है, जो जितना पिएगा, उतना दहाड़ेगा।”
संयोजक इंजीनियर डी.पी. मोदी ने अपने शायराना अंदाज से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। संघ के कार्यालय सचिव अखिलेश्वर पासवान ने ढोंग, पाखंड और अंधविश्वास छोड़कर महापुरुषों के विचारों पर चलने का आह्वान किया। सचिव विष्णु राजक ने कहा कि बहुजन इस देश के मूल निवासी हैं और एकता के बल पर देश के संसाधनों में समान भागीदारी हासिल की जा सकती है।
सभा में सैकड़ों लोग शामिल हुए और वक्ताओं में रूपेश कुमार मेहता, दिवाकर जी, गंगा प्रसाद दास, सुरेश पासवान, अंजार अली, सोहन दास, रविंद्र कुमार महतो, विनय कुमार सिंह, सुजाता कुमारी, चंद्रहास यादव, इंजीनियर हरप्रसाद दास, डॉ. बिणा यादव, डॉ. संजय कुमार पासवान, डॉ. अलका, सविता देवी, मनोज कुमार सिंह, भोला प्रसाद सिंह, अमरकान्त मंडल, डॉ. संदीप और ई. निरंजन कुमार प्रमुख रहे।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. डॉ. योगेंद्र ने बाबू जगदेव प्रसाद और ललई सिंह यादव के जीवन व विचारों पर प्रकाश डालते हुए लोगों से उनके मार्ग पर चलने का आग्रह किया। अंत में उन्होंने सम्मेलन की समाप्ति की घोषणा की।
