बरेली। उर्स-ए-रज़वी के मौके पर बरेली शरीफ़ में लाखों की तादाद में ज़ायरीन पहुँचे। भीड़भाड़ और रौनक से भरे इस माहौल में सिर्फ़ इबादत और दुआओं का ही रंग नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब की भी झलक दिखाई दी।

उर्स में जहां हर तरफ़ रौनक रही, वहीं हमारे हिंदू भाई भी चाय, पापड़, चिप्स, पानी, मिठाई, जलजीरा, कपड़े और तरह-तरह का सामान बेचते नज़र आए। इस दौरान किसी ने उनसे यह नहीं पूछा कि उनका नाम क्या है या उनका मज़हब क्या है।
ज़ायरीन ने खुले दिल से दुकानों से सामान खरीदा और व्यापारी भाइयों ने भी बेखौफ़ अपने कारोबार को अंजाम दिया। इस आपसी मेल-जोल और मोहब्बत के माहौल ने समाज के लिए एक मिसाल पेश की।
जहूर रिज़वी ने बताया कि “उर्स-ए-रज़वी के मौके पर हर समुदाय के लोग अपने-अपने सामान की बिक्री करते हैं। यहां कोई फ़र्क नहीं रखा जाता कि कौन किस मज़हब से है। यही इस मज़ार और उर्स की सबसे बड़ी पहचान है।”
उर्स-ए-रज़वी में इस बार भी लाखों की भीड़ उमड़ी और दुकानों पर रौनक बनी रही। हर तरफ़ भाईचारे और मोहब्बत का पैग़ाम दिखा, जिसने बरेली की सरज़मीन को फिर से गंगा-जमुनी तहज़ीब का आईना बना दिया।
