रिपोर्ट: अमित कुमार भागलपुर, बिहार
भागलपुर को स्मार्ट सिटी का दर्जा तो मिला, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। नगर निगम अंतर्गत ढेबर गेट के समीप लॉटरी सिस्टम के माध्यम से आवंटित की गई दुकानों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव देखने को मिल रहा है। दुकानदारों का कहना है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर उन्हें केवल दुकान की दीवारें मिली हैं, सुविधाएं नहीं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर निगम द्वारा ढेबर गेट के पास कुल 34 से 35 दुकानों का आवंटन सरकारी लॉटरी प्रक्रिया के तहत किया गया था। दुकानदार दुर्गा दास ने बताया कि उन्हें जो दुकान आवंटित की गई है, उसमें न तो शटर की व्यवस्था है, न पेयजल की सुविधा उपलब्ध है और न ही शौचालय का कोई इंतजाम किया गया है। बिजली कनेक्शन तो दिया गया है, लेकिन अन्य आवश्यक सुविधाओं के बिना दुकान संचालन करना बेहद कठिन हो रहा है।
दुर्गा दास ने कहा कि उन्होंने अपनी दुकान संख्या 9 सहित अन्य दुकानों की समस्याओं को लेकर कई बार नगर निगम में आवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दुकानदारों का कहना है कि अधिकतर आवंटी खंजरपुर, बरारी और मायागंज जैसे दूर-दराज इलाकों से आते हैं। ऐसे में दैनिक कार्य के दौरान शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा का न होना गंभीर समस्या बन चुका है।
दुकानदारों ने बताया कि पुरुष तो किसी तरह दूर जाकर व्यवस्था कर लेते हैं, लेकिन महिला दुकानदारों और ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि स्वच्छता और सम्मान के लिहाज से भी चिंता का विषय है।
स्थानीय दुकानदारों ने नगर आयुक्त और नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत आवंटित दुकानों में तत्काल शटर, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि दुकानदार सम्मानपूर्वक अपना व्यवसाय चला सकें।
अब सवाल यह उठता है कि जब शहर को स्मार्ट सिटी कहा जा रहा है, तो क्या बुनियादी सुविधाएं देना भी प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल नहीं है? दुकानदारों की यह समस्या स्मार्ट सिटी योजना की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
