भारतीय मजदूर संघ ने सरकार के कार्यदशा को गिनाया।

भारतीय मजदूर संघ ने सरकार के कार्यदशा को गिनाया।

रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/ बिहार।

प्रस्तावः बिहार में ठेका मजदूरों का सशक्तिकरण एवं भ्रष्टाचार मुक्ति संकल्प मुख्य उ‌द्देश्य ठेका प्रथा में व्याप्त भ्रष्टाचार का उन्मूलन, कार्यदशा में सुधार एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना। 1. समस्या का विश्लेषण (भ्रष्टाचार एवं शोषण के स्वरूप) वर्तमान में बिहार के बिजली विभाग, नगर निगम, स्वास्थ्य सेवाओं और निर्माण क्षेत्र आदि में कार्यरत लाखौं ठेका मजदूर निम्नलिखित कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं: आर्थिक शोषणः बैंक खातों से कट-मनी की जबरन वसूली और न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान।
वितीय धांधली: PF (भविष्य निधि) और ESI की कटौती के बावजूद उसे संबंधित खातों में जमा न करना। अमानवीय कार्यदशाः सुरक्षा उपकरणों के अभाव में बिना ओवरटाइम भुगतान के 12-14 घंटे काम लेना। प्रशासनिक भ्रष्टाचारः मस्टर रोल में ‘घोस्ट वर्कर’ (फर्जी नाम) दिखाकर सरकारी धन का गबन करना।इस सभा द्वारा सर्वसम्मति से निम्नलिखित मांगों को सरकार और संबंधित विभागों के समक्ष रखा चाहिए -१. डिजिटल अटेंडेंसः कार्यस्थल पर Biometric/Geo-tagging आधारित हाजिरी अनिवार्य हो ताकि फर्जी भुगतान रुके। २. PF/ESI पासबुकः हर मजदूर को डिजिटल पासबुक दी जाए जिससे वे अपने अंशदान की रीयल-टाइम निगरानी कर सके। ३. जवाबदेही एवं दंड मुख्य नियोक्ता (Principal Employer) की जिम्मेदारीः यदि ठेकेदार वेतन, PF या सुविधाओं में चूक करता है, तो कानूनन इसकी सीधी जिम्मेदारी ‘प्रिंसिपल एंप्लॉयर (सरकारी विभाग या निजी कंपनी) की होगी। उन्हें भुगतान सुनिश्चित करना होगा। ४. ब्लैकलिस्टिंगः भ्रष्टाचार या शोषण में लिप्त ठेकेदारों को तत्काल काली सूची में डाला जाए और उन पर आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज हो।५. बुनियादी सुविधाएं एवं गरिमा कार्यस्थल सुविधाएं: हर साइट पर पुरुषों और महिलाओं के लिए पृथक शौचालय, स्वच्छ पेयजल, और विश्राम के लिए कॉमन शेड आदि की जल्द से जल्द अनिवार्य रूप से व्यवस्था होनी चाहिए।६. समान काम, समान वेतनः सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, नियमित कर्मचारियों के समान कार्य करने वाले ठेका कर्मियों को समान न्यूनतम वेतन दिया जाए।७. सुरक्षा तंत्र श्रमिक हेल्पलाइन (Anti-Corruption Cell): जिला स्तर पर एक स्वतंत्र प्रकोष्ठ बने जहाँ मजदूर बिना डरे अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।८. सामाजिक सुरक्षाः प्रवासी मजदूरों के लिए पंजीकरण और दुर्घटना बीमा की सुविधा अनिवार्य से होनी चाहिए।९. निगरानी समितियांः प्रत्येक कार्यस्थल पर मजदूर निगरानी समिति का गठन, जो ठेकेदार के क्रियाकलार्पो की ऑडिट करेगी।१०. जागरूकता अभियान के तहत शिविरों के माध्यम से मजदूरों को उनके अधिकारों (जैसे- औ‌द्योगिक विवाद अधिनियम, ठेका श्रम अधिनियम) की जानकारी देना।११. साक्ष्य आधारित विरोधः भ्रष्टाचार के मामलों को ऑडियो/वीडियो साक्ष्यों के साथ सतर्कता विभाग (Vigilance) को सौंपना चाहिए।इस तरह बिहार का श्रमिक अब बिचौलियों के हाथों की कठपुतली नहीं बनेगा। जब तक कार्यस्थल पर बुनियादी सुविधाओं के साथ साथ, सुरक्षा, सम्मान और सही पारिश्रमिक सुनिश्चित नहीं होता तथा जब तक ठेका प्रथा में पारदर्शिता नहीं आती, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।
शोषण मुक्त बिहार, खुशहाल मजदूरः। ।। भारत माता की जय।।आए बी सरेन्द्रण जी,आ० सुनिल किखडे ,बमेदाश शुक्ला आए राजेश कुमार लाल क्षेत्रिय संगठन मंत्री अखिल भारतीय कार्मिकत्ती विकास प्रकोष्ट प्रभारी दोत्रिय संगठन मंत्री,प्रदेश अध्यक्ष,आ० संजय कुमार सिन्हा
प्रदेश महामंत्री सह,अखिल राष्ट्रीय मंत्री,जिला अध्यक्ष चितरंजन पाण्डेय,जिला मंत्री अभिजीत पाण्डेय मौजूद थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!