किशनगंज/टेढ़ागाछ। संवाददाता मोहम्मद मुजाहीर।
आस्था और लोक विश्वास के सबसे बड़े पर्व छठ पूजा की शुरुआत बस एक दिन बाद 25 अक्टूबर से नहाय-खाय के साथ होने जा रही है। लेकिन बिहार के किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड मुख्यालय सहित कई गांवों के छठ घाटों की साफ-सफाई अब तक पूरी नहीं की गई है। इस कारण श्रद्धालुओं में भारी असंतोष और नाराजगी देखने को मिल रही है।
टेढ़ागाछ में गंगा, तालाब और स्थानीय जलाशयों के किनारे बने मुख्य छठ घाटों पर गंदगी, झाड़-झंखाड़ और कीचड़ का अंबार लगा हुआ है। श्रद्धालुओं का कहना है कि हर साल छठ पर्व से पहले प्रशासन सफाई और व्यवस्था का दावा करता है, लेकिन इस बार हालात पहले से भी बदतर हैं। घाटों के आसपास कीचड़ और गंदा पानी जमा है, जिससे व्रतियों और श्रद्धालुओं को पूजा की तैयारी में भारी परेशानी हो रही है।
स्थानीय निवासी मो. एजाज, रंजन सिंह और प्रमिला देवी ने बताया कि छठ पूजा की तैयारियां घर-घर में जोरों पर हैं, लेकिन घाटों की बदहाली देखकर मन खिन्न हो जाता है। उन्होंने कहा, “प्रशासन और जनप्रतिनिधि सिर्फ कागजों पर तैयारी दिखाते हैं। जमीन पर कोई काम नहीं हुआ है।”
लोगों ने बताया कि पिछले साल भी इसी तरह लापरवाही देखने को मिली थी, और आखिरी क्षणों में कुछ औपचारिक सफाई कर खानापूरी की गई थी। इस बार भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। न तो बीडीओ, सीओ या पंचायत प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे हैं, और न ही सफाई कर्मियों की कोई तैनाती की गई है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि छठ महापर्व में घाटों की स्वच्छता, सुरक्षा और प्रकाश व्यवस्था सबसे अहम होती है, लेकिन टेढ़ागाछ में इन सबका अभाव साफ नजर आ रहा है। कुछ जगहों पर तो घाटों तक पहुंचने वाले रास्ते भी टूटे और कीचड़ भरे हैं।
छठ पर्व बिहार और पूर्वी भारत में लोक आस्था का सबसे बड़ा उत्सव है, जिसमें चार दिनों तक सूर्य देव और छठी मइया की पूजा की जाती है। इस दौरान व्रतधारी महिलाएं कठोर नियमों का पालन करती हैं और डूबते तथा उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करती हैं। इसलिए घाटों की स्वच्छता और सुरक्षा का विशेष महत्व होता है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तुरंत घाटों की सफाई, रोशनी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं ताकि श्रद्धालु निर्बाध रूप से पूजा कर सकें। साथ ही स्थानीय युवाओं ने भी पहल करते हुए स्वयंसेवी तौर पर घाटों की सफाई शुरू करने का निर्णय लिया है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी और प्रशासनिक सुस्ती को लेकर लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि हर बार चुनाव के समय विकास और सेवा के वादे किए जाते हैं, लेकिन जब जनता की आस्था और सुविधा की बात आती है, तब कोई आगे नहीं आता।
अब देखना यह है कि प्रशासन आखिरी समय में किस हद तक तैयारी कर पाता है और श्रद्धालुओं की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है, क्योंकि 25 अक्टूबर को नहाय-खाय और 28 अक्टूबर को अर्घ्यदान के साथ लाखों श्रद्धालु सूर्य देव की आराधना करेंगे।
टेढ़ागाछ के लोगों की एक ही अपील है
“छठ घाटों को स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाइए — यही सबसे बड़ा पूजा होगा।”
