भाकपा-माले ने दी जालियांवाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि छीने जा रहे हैं नागरिक अधिकार, बढ़ रही जनता की परेशानी : भाकपा–माले

 

भाकपा-माले ने दी जालियांवाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि

छीने जा रहे हैं नागरिक अधिकार, बढ़ रही जनता की परेशानी : भाकपा–माले

रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/ बिहार।

भाकपा (माले) व ऐक्टू ने जलियांवाला बाग नरसंहार के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। 107 वर्ष पहले 1919 में अंग्रेजी हुकूमत द्वारा लाए गए ‘अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम’ के विरोध में सैकड़ों भारतीय अमृतसर के जलियांवाला बाग में शांतिपूर्ण सभा कर रहे थे, इसी दौरान अंग्रेज अधिकारी जनरल रेजिनल डायर ने सभा पर गोलियां चलवा दी, जिसमें सैकड़ों निहत्थे, निर्दोष भारतीय मारे गए थे। यह काला कानून ‘रॉलेट एक्ट’ के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने शहीद वेदी पर पुष्प अर्पित कर शहीदों की याद में दो मिनट मौन रखा।

पार्टी प्रभारी व ऐक्टू के राज्य सचिव मुकेश मुक्त ने मौके पर कहा कि अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ मज़बूत होती आंदोलनकारियों की आवाज को दबाने के लिए ब्रिटिश गवर्नमेंट ने रॉलेट एक्ट जैसा कानून लाया था। इससे ब्रिटिश सरकार को यह अधिकार मिल गया था कि वह किसी भी भारतीय पर अदालत में बिना मुकद्दमा चलाए उसे जेल में बंद कर सकता था। इस क़ानून के तहत अपराधी को उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने वाले का नाम जानने तक का अधिकार भी समाप्त कर दिया गया। इसके लिए एक अलग विशेष न्यायालय बनाया गया और यहां हुए फैसले के खिलाफ किसी उच्च न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती थी। सरकार को यह अधिकार मिल गया कि वह प्रेस की स्वतंत्रता को छीन ले और किसी को भी जेल में डाल दे या देश से निकाल दे।
उन्होंने कहा कि आजादी के 75 साल बाद केंद्र की विनाशकारी मोदी सरकार भी उसी रास्ते पर चल पड़ी है। संविधान में नागरिक विरोधी संशोधन कर रही है। अपने विरोधियों को कुचलने के लिए झूठे मुकदमे थोप रही और जेलों के अन्दर बंद कर दे रही है। बिना मुकदमा चलाए वर्षों जेल बंद रख रही है। इस देश विरोधी सरकार ने लोगों के नागरिकता तक को खतरे में डाल दिया है। एसआईआर के बहाने लाखों मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट से काट कर चुनाव हड़प ले रही है। नए – नए काले कानूनों के जरिए जनता के अधिकारों को कुचल रही है और विरोध करने वालों देशद्रोही बता रही है। अंग्रेजी हुकूमत से पेंशन पाने वालों का ये वंशज देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की घृणित राजनीति के जरिए देश के संसाधनों पर कब्जा कर रही है। हमें आजादी आंदोलनों के शहीदों से प्रेरणा लेते हुए हर संभव कुर्बानी देकर इस जन विरोधी, देश विरोधी सत्ता को उखाड़ फेंकने की जरुरत है।

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