सहर में सांस्कृतिक पदयात्रा।15 राज्यों के प्रतिभागियों ने अपनी अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुत दी

संवाददाता शुभम कुमार भागलपुर/बिहार

भागलपुर खेल मंत्रालय भारत सरकार के अधीन संचालित राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्रीय निदेशालय बिहार एवं झारखंड तथा राष्ट्रीय सेवा योजना निदेशालय के अधीन संचालित राष्ट्रीय सेवा योजना तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय भागलपुर के संयुक्त तत्वाधान में 2003 के बाद 22 वर्षों के बाद हो रहे राष्ट्रीय एकता शिविर के पांचवें दिन आज सुबह के प्रथम सत्र के बाद शहर में सांस्कृतिक पदयात्रा निकाली गई । इस यात्रा में सभी 15 राज्यों के प्रतिभागियों ने अपनी अपनी सांस्कृतिक वेशभूषा ,वाद्ययंत्र गायन शैली एवं नृत्य शैली से शहर वासियों को परिचित कराय। असम का आसमी आंध्रप्रदेश का तेलुगु , उड़ीसा का उड़िया ,बंगाल का बंगाली तो कहीं हरियाणवी ,राजस्थानी, पंजाबी और गुजराती भाषा में गीत चल रहे थे । लोग ढोल नगाड़ों पर झूम रहे थे और संपूर्ण शहर वासियों ने आज भागलपुर शहर के सड़कों पर लघु भारत का दर्शन किया जिसमें 15 राज्यों के प्रतिभागियों ने अपने सांस्कृतिक कौशल से सभी को परिचित कराया। यह झांकी तिलकामांझी विश्वविद्यालय के स्टेडियम से प्रारंभ होकर सराय चौक, नई बाजार चौक ,बूढ़ानाथ चौक, दीपप्रभा चौक होते हुए सीएमएस ग्राउंड में पहुंची । वापसी में झांकी विश्वविद्यालय परिसर में पहुंची। उस अवसर पर विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय के संकाय अध्यक्ष प्रोफेसर सी पी सिंह ने एवं बजट पदाधिकारी ए एन सहाय ने सभी को संबोधित किया। झांकी के समापन के बाद आयोजन में एसडीआरएफ के कुमार नवीन ने स्वयंसेवक सेविकाओं को सीपीआर मेथड ब्लड कंट्रोल तथा फायर से बचने के तौर तरीकों से परिचित कराया इसके बाद हुए अकादमी सत्र में ग्रीन एवं संपोषित भारत विषय पर मुंगेर विश्वविद्यालय के कोऑर्डिनेटर डॉ मुनेंद्र कुमार ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया पांचवें दिन के अंतिम अकादमी क्षेत्र में रसायन विज्ञान विभाग पीएनबी महाविद्यालय के डॉ राजीव कुमार सिंह एवं विधि स्नातकोत्तर के विभाग अध्यक्ष डॉ अमित कुमार अकेला ने सॉफ्ट पावर एवं कल्चरल डिप्लोमेसी पर स्वयंसेवकों को संबोधित किया कार्यक्रम में सांस्कृतिक संध्या में सभी 15 राज्यों के दलों ने भारत के जो 6 सूचीबद्ध क्लासिकल डांस हैं कुचिपुड़ी ,भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी , मणिपुरी आदि पर प्रतियोगिता के रूप में सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी प्रत्येक दिन युगचेतना फाउंडेशन द्वारा प्रथम द्वितीय एवं तृतीय विजेताओं को पुरस्कृत किए

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