भागलपुर 24 मार्च ’26
समन्वय समिति और गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में ईद मिलन समारोह का आयोजन डॉ मनोज कुमार, पूर्व कुलपति अंतर्राष्ट्रीय गांधी हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की अध्यक्षता में किया गया।
रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/बिहार।
कार्यक्रम का संचालन प्रो डॉ फारूक अली, पूर्व कुलपति जे पी विश्वविद्यालय छपरा, धन्यवाद ज्ञापन प्रकाश चंद्र गुप्ता, अध्यक्ष, गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र और स्वागत संजय कुमार द्वारा किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित सभी लोग एक दूसरे से गले मिले और ईद की मुबारकबाद दी।
कार्यक्रम में मोहम्मद फारूक आजम ने कहा कि ईद एक माह तक रोजा रखने के पश्चात आता है। इस्लाम में इसे सबसे पवित्र माह कहा जाता है जो नेकी और सब की सलामती का संदेश देता है। यह त्यौहार किसी भी वर्ग भेद को अस्वीकार करता है और सब के साथ प्रेम और खुशियां बांटने का संदेश देता है। इसमें अपने पड़ोस के प्रति जिम्मेदारी और सब के सलामती का संदेश है। उन्होंने कहा कि इस्लाम के तालीम के अनुसार रोजा और ईद का संदेश मुसलमानों का नैतिक दायित्व है।
उदय जी ने कहा कि सम भाव से ही सद्भाव आता है।यह हमारी पहली कड़ी है, हमने जो ज्ञान में सीखा है समझा है उस ज्ञान और समझ के अनुसार सभी एक ही ईश्वर की संतान है। इसलिए भोजन, आवास और पहनावे के आधार पर भिन्नता पैदा करना मानवता के खिलाफ है। ईद इसी मानवता को जीवंत बनाए रखने का संदेश देता है। मो तकी अहमद जावेद ने कहा की रोजा रखकर और नमाज 30 दिन पढ़कर मुसलमान की पहचान नहीं होती मुसलमान की पहचान तब होती है जब पड़ोसी खुश राहत और पांच वक्त की नमाज पढ़ता हूं और उसे हर चीज से परेश करता हूं तभी वह मुकम्मल मुसलमान कहलाता है
जिनी हिंदी ने जकात और फितरा का जिक्र करते हुए रोजा और ईद के महत्व को विस्तार से परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि त्याग ,प्रेम और भाईचारा फैलाना तथा सब के साथ बराबरी का भाव रखना ईद का संदेश है। मोहम्मद महबूब आलम ने सबको ईद की मुबारकबाद दी। मोहम्मद अब्दुल करीम अंसारी ने कहा कि तमाम धर्म से जो ऊपर है उसका नाम मानवता है। और यह त्यौहार फिरका परस्त के बजाय मानवता का धर्म सीखता है ।
रामशरण जी ने कहा कि खुशियां बांटने से बढ़ता है और दुख बांटने से घटता है। इसलिए खुशी बांटना हमारी जिम्मेदारी है और सब के प्रति भाईचारा रखना आवश्यकता है। आज इसका विकास हो रहा है इसको समझते हुए हम अधिक से अधिक फैलाएं,यह जितना अधिक से अधिक फैलाया जाएगा,उतनी हमारी सफलता है। वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन मैं हमने सम्मिलित शक्ति का उपयोग किया ।जिसे भुलाया नहीं जा सकता है। परिणाम यह हुआ कि हम जल्दी स्वतंत्रता हासिल कर सके। इसलिए साझी संस्कृति को जीवंत बनाने की आवश्यकता है जो ईद का संदेश है।
कमल जायसवाल ने कहा कि वातावरण बनाने से बनता है हम भाषण के बजाय काम पर अधिक से अधिक ध्यान दें दिलों को जोड़ने का काम करें और पड़ोस में कोई हामिद नहीं रहे। जो इस ईद का संदेश है उसको जीवन में अंगीकार करें।
अध्यक्ष डॉ मनोज कुमार, ने कहा कि गांधी जी ने अपने सत्याग्रह के सभी अस्त्रों में से उपवास को अमोघ अस्त्र माना था और रमजान में एक महीने तक उपवास रखना इसी भाव को प्रदर्शित करता है।हम मन, वचन और कर्म से सबके प्रति समान भाव रखें यही आज के समय की और इस कार्यक्रम की सार्थकता है।
कार्यक्रम में डॉक्टर पी सी पांडे, राजकुमार ,डॉक्टर जयंत जलद, सच्चिदानंद किरण,दीपक कुमार ने अपनी कविता के माध्यम से ईद की विशेषता और सब के प्रति ईद की हार्दिक शुभकामना देने का संदेश दिया। इस अवसर पर मोहम्मद तकी अहमद जावेद, मोहम्मद शाहबाज, महबूब आलम, बीना देवी, अनीता शर्मा ने भी अपने विचार रखें।
प्रकाश चंद्र गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहां की हम ईद की खुशियां और सेवई की मिठास जन-जन तक फैलाए लोगों के दिलों को जोड़ें और सब के प्रति भाई चारा का भाव रखें, यही ईद का संदेश है और इस कार्यक्रम का भी संदेश है, सबको ईद की मुबारक।
उपस्थित प्रमुख लोगों में वासुदेव भाई,मोहम्मद काबुल,मोहम्मद आलम,मोहम्मद फिरोज अनवर, भागलपुरी ,राजकुमार, मदन कुमार, राम चरण,डॉ रामरेखा प्रसाद सिंह, अजीत कुमार, डॉक्टर बी मोहन, कमल जायसवाल,अनीता शर्मा, मोहम्मद शमी मोहम्मद काबुल, सरिता देवी ,प्यारी देवी सहित अनेकों लोग उपस्थित थे।
