रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/ बिहार
भागलपुर जिले अंतर्गत नगर निगम क्षेत्र के झुनझुनवाला कॉलेज के समीप संत मारुति नंदन जी महाराज ने बताया की मोहरी मंदिर 155 वर्षों से यहां परंपरागत भगवान विष्णु की पूजा होते आ रही है ये मोहरी बाई के नाम से जाना जाता वैष्णव धर्म के मेरे श्री श्री 108 केशवाचार्य बालक स्वामीजी महाराज जी हमारे दीक्षा गुरु के साथ संत रूपी प्रेरणा दिया है। गोदामा धनुर मास में भगवान विष्णु के प्रति अपनी अटूट भक्ति के लिए पूजी जाती थी इसी धनुर्मास के दिन भगवान रंगनाथ जो खास कर धनुर्मास में शादी गोदा माँ से रचाए थे ऐसे तो कहा जाता की गोदा माँ दक्षिण भारत की एक महान संत कवियत्री और अलवर संतों में एक मात्र महिला थीं। माँ भगवान विष्णु की पूजा और अटूट भक्ति के लिए पूजी जाती।गोदा माँ ने तिरुप्पावै नामक भक्ति रचना की थी ।। वहीं भक्ति की एक अनुभव साझा किया डॉ विनय कुमार पांडे ने बताया इस इस स्थान पर लगभग लगभग 25 वर्षों से आ रहा हूं यह एक सिद्ध पीठ है जहां की आने बस से सभी की मनोकामना पूरी होती है ऐसा इसलिए क्योंकि मुझे मिला है बिल्कुल मैं जमीन पर आ गया था क्योंकि नेपाल में प्रोफेसर की जो मेरे खुद के नौकरी को छोड़कर में अरुणाचल आ गया और फिर आसाम राइफल्स में कुछ टेक्निकल की कमी के कारणों से मुझे असफलता मिली मैं वहां से बिहार भागलपुर घर आया और लगातार मंदिर में आकर विष्णु सहस्त्र नामों को भगवान को सुनाया तो मुझे अरुणाचल में ही सेंट्रल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हेड के पद पर फिर से नौकरी मिली और अभी प्रोफेसर हेड से सेवानिवृत हूं मैं ये नहीं कहता किसी एक को भजिए परंतु किसी भी देवी, देवता को भजिए सभी विष्णु के रूप हैं और आप अगर भजते हैं तो जरूर आपको मन की सुख,शांति खास कर मानसिक शांति मिलती आरोग्य भी मिलता ऐसा मेरा मानना है मैं दरियापुर गांव है पर मेरी पैतृक गांव नगरह है बालक स्वामीजी महाराज जी दीक्षा गुरु के साथ मेरे चचेरे बड़े भाई भी हैं ।।
