संवाददाता शुभम कुमार भागलपुर/बिहार
अभाविप नवगछिया जिला संयोजक गौतम साहू ने बताया कि सरस्वती पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि ज्ञान बुद्धि कला और नैतिक विवेक के प्रति समाज को सामूहिक आस्था का प्रतीक है। यह पर्व प्रतिवर्ष माघ शुक्ल पंचमी को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। सरस्वती पूजा 23 जनवरी को है इस दिन खासकर विद्यार्थी शिक्षक कलाकार लेखक और विद्वान वर्ग, मां सरस्वती की उपासना कर ज्ञान प्राप्ति की कामना करते हैं सनातन मान्यता के अनुसार ज्ञान के बिना जीवन अंधकार में होता है और सरस्वती पूजा इस अज्ञान रूपी अंधकार से मुक्ति का प्रतीक है। यह पर्व मानव को विवेक और सृजनात्मक चेतन की ओर प्रेरित करता है मां सरस्वती का उल्लेख अनेकों प्राचीन और प्रमाणिक सनातन ग्रंथ में मिलता है। ऋग्वेद में मां सरस्वती को ज्ञान की देवी के रूप में वर्णित किया गया है। यजुर्वेद और अथर्ववेद में उन्हें वाणी, मेघा और प्रज्ञा की स्रोत माना गया है पुराणों में भी मां सरस्वती का वर्णन है। सरस्वती पूजा के दिन पुस्तकों, वाद्य यंत्रों, लेखनी और शिक्षण सामग्री की भी पूजा की जाती है जो यह संदेश देती हैं कि विद्या केवल अर्जन की वस्तु नहीं, बल्कि पूजनीय साधना है। पीले वस्त्र, श्वेत कमल, वीणा और हंस जैसे प्रतीक शुद्धता और विवेक के घोतक है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब भौतिकता और दिखावे का प्रभाव बढ़ रहा है, सरस्वती पूजा समाज को यह स्मरण कराती है कि ज्ञान संस्कार और नैतिकता ही किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होते हैं। यह पूर्व शिक्षा, संस्कृति और भारतीय सभ्यता की निरंतरता का जीवंत प्रतीक है।
