मोहम्मद मुजाहिर किशनगंज बिहार
टेढ़ागाछ (किशनगंज)।मटियारी पंचायत के मालीटोला गांव में कनकई नदी का विकराल रूप एक बार फिर स्थानीय लोगों के लिए संकट बन गया है। बीते कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे पहले से की गई बोल्डर पिचिंग बह गई है और अब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क कटाव की जद में आ गई है। यह सड़क लौचा से नया हाट को जोड़ती है, जो इस इलाके की प्रमुख संपर्क मार्ग मानी जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि कनकई नदी का तेज बहाव सड़क के बिलकुल करीब पहुंच चुका है। कटाव अब सड़क से कुछ ही मीटर की दूरी पर है। यदि समय रहते रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो यह सड़क कभी भी नदी में समा सकती है। इससे न केवल ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित होगी बल्कि आसपास की बस्तियों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है।
मुखिया प्रतिनिधि शफदर हुसैन अंसारी और वार्ड सदस्य केयूम आलम ने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर कटाव हुआ था, तब प्रशासन की ओर से अस्थायी रूप से बोल्डर डंपिंग और सैंड बैगिंग की गई थी, लेकिन इस बार का जलस्तर और भी अधिक बढ़ जाने से सारी व्यवस्था बह गई है। उन्होंने कहा कि हालात दिन-ब-दिन भयावह होते जा रहे हैं, और कटाव की गति को देखते हुए अब गांव के कई घर भी खतरे के घेरे में आ गए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और आरडब्लूडी विभाग से तुरंत स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र बोल्डर डंपिंग, सैंड बैगिंग और पक्के तटबंध निर्माण की प्रक्रिया नहीं शुरू हुई तो आने वाले दिनों में सड़क के साथ-साथ पूरे गांव के अस्तित्व पर संकट आ सकता है।
मटियारी पंचायत के निवासी सलीम मियां, रमेश मंडल, श्रीमती रेखा देवी सहित कई लोगों ने कहा कि सड़क के ध्वस्त होने से बच्चों की पढ़ाई, बाजार आने-जाने, स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच और दैनिक जीवन पर भारी असर पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह प्रधानमंत्री ग्राम सड़क गांव की जीवनरेखा है — इसके कट जाने पर पूरा इलाका अलग-थलग पड़ जाएगा।
उधर, प्रशासनिक स्तर पर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय राजस्व कर्मियों और अभियंताओं की टीम से निरीक्षण कराए जाने की मांग उठ रही है। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक ठोस तकनीकी उपाय नहीं अपनाए जाते, तब तक हर साल इसी तरह कटाव का खतरा बना रहेगा।
कनकई नदी के किनारे बसे मटियारी पंचायत के लोग अब प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं ताकि सड़क और गांव दोनों का अस्तित्व बचाया जा सके और हर साल की इस त्रासदी से स्थायी राहत मिल सके।
