मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीन, चम्पानगर, भागलपुर (बिहार) में शनिवार 17 जनवरी 2026 को अत्यंत भव्य, बरकत-भरी तथा इल्मी व रूहानी तक़रीब के रूप में ख़त्म-ए-बुख़ारी शरीफ़ और ख़त्म-ए-हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन करीम का आयोजन किया गया।

रिपोर्ट – अमरजीत कुमार तिवारी भागलपुर /बिहार।

पूरे वक़ार और दीनि शान के साथ किया गया। इस सईद और यादगार अवसर पर क़ुरआन करीम का आख़िरी सबक़ हाफ़िज़ अब्दुल्लाह बुख़ारी ने रिवायत-ए-हफ़्स अ़न आसिम के अनुसार मुकम्मल किया, जबकि सहीह बुख़ारी शरीफ़ का आख़िरी सबक़ मुफ़्ती सलमान साहब मंसूरपुरी (उस्ताद-ए-हदीस, दारुल उलूम देवबंद) ने अत्यंत ख़ुशूअ, इल्मी संजीदगी और प्रभावशाली अंदाज़ में पढ़ाया। इस अज़ीम इज्तिमा में मदरसे के मुहतमिम मौलाना क़ारी मुहम्मद असअद साहब क़ासमी की सरपरस्ती और निगरानी प्राप्त रही, नायब मुहतमिम मौलाना मुफ़्ती उबैदुर्रहमान साहब, शैख़ुल हदीस मुफ़्ती इलियास साहब क़ासमी, नायब शैख़ुल हदीस मौलाना मुहम्मद ओवैस साहब क़ासमी, क़ाज़ी इमारत-ए-शरइया मुफ़्ती खुर्शीद अनवर साहब मौलाना मुईनुद्दीन क़ासमी तथा इमारत-ए-शरइया पटना के नायब क़ाज़ी मौलाना मुजीब साहब की गरिमामयी उपस्थिति ने तक़रीब को और अधिक वक़ार प्रदान किया। इस अवसर पर लेखक मौलाना मुहम्मद यासिर अहमद हनफ़ी सहित बड़ी संख्या में उलेमा-ए-किराम, असातिज़ा, हुफ़्फ़ाज़-ए-क़ुरआन, तलबा और क्षेत्र के लोग मौजूद रहे। अपने ख़िताबात में उलेमा-ए-किराम ने क़ुरआन व हदीस की अज़मत, इल्म-ए-दीन की फ़ज़ीलत और दीनि मदरसों की सर्वांगीण भूमिका पर विस्तारपूर्वक और तर्कसंगत रूप से रौशनी डाली। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीन एक क़दीम और भरोसेमंद दीनि इदारा है, जो वर्षों से दीनियात, हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन करीम रिवायत-ए-हफ़्स के साथ, इल्म-ए-क़िराआत, तज्वीद, नाज़िरा, अरबी और इस्लामियात की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ मौलवी, फ़ाज़िल और मुफ़्ती कोर्सों की मानक तालीम प्रदान कर रहा है, साथ ही आधुनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दसवीं और बारहवीं कक्षा (10+2) की तैयारी का भी प्रभावी और सुव्यवस्थित इंतज़ाम मौजूद है, जिसके माध्यम से छात्र दीनि और असरी तालीम को एक साथ हासिल कर रहे हैं। ख़त्म-ए-बुख़ारी शरीफ़ के बाद रक़्क़त-आमेज़ और ख़ुलूस-भरी दुआएँ की गईं, जिनमें मुल्क-ओ-मिल्लत, उम्मत-ए-मुस्लिमा, दीनि मदरसों की हिफ़ाज़त, तलबा की इल्मी व अमली तरक़्क़ी और आलम-ए-इस्लाम की सलामती के लिए विशेष दुआ की गई। तक़रीब के इख़्तिताम पर मदरसे के ज़िम्मेदारान ने तमाम मेहमान उलेमा, असातिज़ा, सहयोगियों और अहल-ए-ख़ैर का शुक्रिया अदा करते हुए इस अज़्म का इज़हार किया कि मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीन आगे भी क़ुरआन, हदीस, फ़िक़्ह और इल्म-ए-क़िराआत की ख़िदमत इख़लास, इस्तिक़ामत और ज़िम्मेदारी के साथ अंजाम देता रहेगा और नेक, बाअख़लाक़ और बाअइल्म नस्ल की तैयारी में अपना तारीख़ी किरदार पूरी ताक़त के साथ जारी रखेगा।

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