ज़की हमदम किशनगंज। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जिले में बाल विवाह उन्मूलन को लेकर व्यापक जनजागरण गतिविधियाँ आयोजित की गईं। जिला अधिकारी के नेतृत्व में विभिन्न विभागों, संस्थानों और समुदायों की सहभागिता के साथ पूरे जिले में सामूहिक रूप से बाल विवाह मुक्त किशनगंज बनाने की शपथ ली गई।

जन निर्माण केंद्र एवं महिला एवं बाल विकास निगम, किशनगंज द्वारा 27 नवंबर को विशेष शपथ अभियान चलाया गया। इस दौरान स्कूलों, कॉलेजों, ग्रामीण समुदायों और विभिन्न संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने लोगों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि बाल विवाह में किसी भी तरह की भागीदारी—चाहे वह मेहमान, कैटरर्स, टेंट हाउस, बैंड पार्टी, सजावटकर्ता या विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहित हों—सभी कानूनन दंडनीय अपराध के दायरे में आते हैं।
भारत सरकार द्वारा जारी 100 दिवसीय विशेष कार्ययोजना से उत्साहित जन निर्माण केंद्र ने घोषणा की कि वह सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर एक वर्ष के भीतर किशनगंज को पूरी तरह बाल विवाह मुक्त जिला बनाने की दिशा में कार्य करेगा। संस्था के निदेशक राकेश कुमार सिंह ने कहा कि यह अभियान देश की दिशा बदलने वाला साबित होगा और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सरकार द्वारा शुरू की गई इस 100 दिवसीय गहन जागरूकता योजना को तीन चरणों में विभाजित किया गया है। पहला चरण 31 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें शिक्षण संस्थानों में जागरूकता प्रसार पर जोर रहेगा। दूसरा चरण 1 से 31 जनवरी के बीच चलेगा, जिसके तहत मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों, गुरुद्वारों, बैंक्वेट हॉलों और विवाह सेवाएं देने वाले व्यवसायों को अभियान से जोड़ा जाएगा। तीसरा और अंतिम चरण 8 मार्च 2026, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस तक संचालित होगा, जिसमें ग्राम पंचायतों, नगरपालिका वार्डों और समुदाय स्तर पर सशक्त भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं ने कहा कि सामूहिक प्रयास और जागरूकता के माध्यम से ही जिले को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सकता है। अभियान के तहत आने वाले दिनों में भी व्यापक स्तर पर जनसहभागिता को बढ़ाने की योजना है।
