किशनगंज, टेढ़ागाछ से मोहम्मद मुजाहीर की रिपोर्ट।
किशनगंज जिले के धवेली पंचायत में किसानों की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। कमाती और लोधाबाड़ी गांव में खेतों की सिंचाई के लिए लगाया गया सरकारी नलकूप पिछले 20 वर्षों से खराब पड़ा है। रखरखाव के अभाव में यह नलकूप अब जंगल-झाड़ में तब्दील हो चुका है।
सिंचाई के अभाव में किसानों के खेत सूख रहे हैं और वे पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। किसानों का कहना है कि अधिकारियों की ओर से केवल कागजी कार्रवाई की जाती है और सरकार को गलत जानकारी भेज दी जाती है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।
प्रखंड प्रमुख उजाला परवीन ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार को पंजाब और हरियाणा से सीख लेनी चाहिए, जहां हर खेत तक सिंचाई की व्यवस्था है।
किसान बताते हैं कि गेहूं, चना, पटसन, प्याज, लहसुन, अदरक और ईख जैसी फसलों की खेती करना उनके लिए दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है। मजबूरी में उन्हें अपनी उपज कम दामों पर बेचनी पड़ रही है, क्योंकि राज्य में प्रखंड स्तर पर मंडी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। अन्य राज्यों की तरह बिहार में भी मंडियों की व्यवस्था की मांग किसान लंबे समय से करते आ रहे हैं।
किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए तो आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। किसानों के अनुसार, यह समस्या सिर्फ धवेली पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बिहार की कृषि व्यवस्था की जमीनी सच्चाई है।
