मदरसा दारुल उलूम इमदादिया में जश्ने दस्तारबंदी: दो दिवसीय इजलास रुहानी और इल्मी माहौल में संपन्न

किशनगंज | मोहम्मद मुजाहीर की रिपोर्ट

किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत रहमत नगर नेमाटोली भोरहा स्थित मदरसा दारुल उलूम इमदादिया में आयोजित दो दिवसीय इजलास-ए-दस्तारबंदी हुफ़्फ़ाज़-ए-किराम बेहद रुहानी, इल्मी और शानदार माहौल में संपन्न हो गया। इस मुबारक मौके पर बड़ी संख्या में उलेमा-ए-कराम, समाजसेवी, इलाके के बुज़ुर्ग और अहले-ईमान हज़रात की मौजूदगी ने कार्यक्रम की रौनक़ को और बढ़ा दिया।

इस इजलास में दारुल उलूम देवबंद (सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) सहित बिहार के विभिन्न जिलों, खास तौर पर किशनगंज जिले और टेढ़ागाछ इलाके से आए नामचीन उलेमा-ए-कराम ने शिरकत की। सभी उलेमा ने अपने-अपने अंदाज़-ए-बयान में खिताब फरमाते हुए दीन की अहम नसीहतें पेश कीं, जिससे महफ़िल इल्म और बरकत से भर गई।

कार्यक्रम के दौरान कुरआन पाक हिफ़्ज़ मुकम्मल करने वाले तमाम हाफ़िज़-ए-कुरआन के सर पर उलेमा-ए-कराम के मुबारक हाथों से दस्तार (पगड़ी) बांधी गई। इस अवसर पर टेढ़ागाछ प्रखंडवासियों की ओर से तमाम हुफ़्फ़ाज़-ए-किराम को दिली मुबारकबाद पेश की गई।

उलेमा-ए-कराम ने दुआ करते हुए कहा कि अल्लाह तआला दस्तारबंदी से सम्मानित होने वाले तमाम हुफ़्फ़ाज़-ए-किराम को दीन की सच्ची खिदमत की तौफ़ीक अता फरमाए और उन्हें इल्म-ए-दीन का सच्चा अमीन बनाए। साथ ही मदरसा दारुल उलूम इमदादिया को दीन की तालीम, तलबा की बेहतर तरबियत और क़ौम-ओ-मिल्लत के उज्ज्वल भविष्य का ज़रिया बनाए।

कार्यक्रम के अंत में तमाम शिरकत करने वाले उलेमा-ए-कराम, मेहमानों और आयोजन में सहयोग करने वाले हज़रात के लिए खास दुआ की गई। यह इजलास इलाके के लिए यादगार और बरकतों से भरपूर साबित हुआ।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

 

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