मां शैलपुत्री दुर्गा के प्रथम स्वरूप का आगमन

रिपोर्ट – अमित कुमार, भागलपुर से

भागलपुर भीखनपुर गुमटी नंबर 1 वार्ड 35 की श्रद्धालु ऊषा देवी उर्फ मुन्नी देवी (पति स्वर्गीय दिगम्बर प्रसाद दूबे) ने संपूर्ण पाठ के दौरान बताया कि मां शैलपुत्री बैल पर सवार होकर एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल फूल धारण किए हुए आश्विन मास के शुक्लपक्ष प्रतिपदा तिथि को पधारी हैं।

आज से ही सभी मंदिरों और घरों में संकल्पित पाठ के साथ उपासक मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना आरंभ कर चुके हैं। ऊषा देवी ने मंत्र का अर्थ समझाते हुए कहा—
“माता सब प्राणियों की बाधा दूर करती हैं और भक्तों को धन, विद्या, यश और संतान सुख प्रदान करती हैं।”

उन्होंने अपनी श्रद्धा से जुड़ा अनुभव साझा करते हुए कहा कि वर्ष 1987 में जब उनके पति की आवाज चली गई थी, तब उन्होंने मां से मन्नत मांगी। मां की कृपा से आवाज लौट आई और तब से पिछले 40 वर्षों से लगातार फलाहार पर रहकर पूजा करती आ रही हैं। आज 65 वर्ष की उम्र में भी वे उसी नियम का पालन कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि उन्हें तीन पुत्रियां और तीन पुत्र हैं, पुत्रियां सभी विवाहित हैं और पुत्र उनके साथ रहते हैं।
अंत में उन्होंने माता रानी की जयकारा लगाते हुए कहा—
जय माता दी की जय।

 

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