गांधी शांति प्रतिष्ठान के सभागार में प्रकाश चंद गुप्ता की अध्यक्षता एवं डॉ सुनील अग्रवाल के संचालन में जैन धर्म के 24 में तीर्थंकर महावीर जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी आयोजित किया गया।

गांधी शांति प्रतिष्ठान के सभागार में प्रकाश चंद गुप्ता की अध्यक्षता एवं डॉ सुनील अग्रवाल के संचालन में जैन धर्म के 24 में तीर्थंकर महावीर जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी आयोजित किया गया।

रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/बिहार।

भागलपुर नगर में सर्वप्रथम गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र के उपाध्यक्ष मोहम्मद एनुअल हुड्डा ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि आज के युद्ध वीविष्का में पूरी दुनिया में भगवान महावीर के संदेशों का बड़ी महत्व है
शहर की वरिष्ठ समाजसेवी रामशरण जी ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि पर्यटन के लिहाज से स्थानीय महावीर मंदिर जैनियों के लिए प्रमुखता से उबड़कर सामने नहीं आ पाया है इसके लिए सरकार एवं स्थानीय प्रबुद्ध जनों को ध्यान देना अति आवश्यक है।
परिवार विकास संस्था के प्रमुख जमुई से आए हुए भवन आनंद जी ने आधुनिक दुनिया की वातावरण से संबंधित आदमी नामक कविता पाठ कर मनुष्यता का संदेश दिया।
जैन धर्म के अनुयाई उज्जैन कुमार जैन ने बताया कि जैन धर्म रुलिंगिता से दूर रहते हैं तथा प्रकृति नियमानुकूल जीवन व्यतीत करने को प्रधानता देते हैं। जयंती की सार्थकता तभी है जब हम महावीर जी के उपदेशों के अनुसार चले।
गांधी विचार विभाग के प्रोफेसर डॉ उमेश प्रसाद नीरज ने जैन धर्म के बारे में तीर्थंकर बसु पूज्य का जन्म एवं शिक्षस्थली भागलपुर है यह बताया सिदो का सिद्धि प्राप्त उपरांत परमात्मा बन जाता है सर दर्द संभव पर अहिंसा टिका होता है अनेकांतवाद तथा त्याग्वाद मानव समाज की क्षमता हेतु परम आवश्यक है।
समाज कर्मी अनीता शर्मा ने कहा कि भगवान महावीर शांति के मार्ग पर जीवन बिताते हुए मानव को शांति व अहिंसा मार्ग पर चलने का उपदेश दिया है।
बारिश पत्रकार परेशान लेटेंट ने अपने उधर व्यक्त करते हुए कहा कि अंग प्रदेश का शहर भागलपुर कई विभूतियों की जन्मस्थली कार्यस्थली रही है यह स्थान नई विभूतियों से विशेष रूप से महत्वपूर्ण है महावीर जी के उपदेशों को महात्मा गांधी ने अपने जीवन में उतर कर मानवों के बीच स्थापित करने का प्रमुख कार्य किया भगवान महावीर ने इस क्षेत्र के प्रमुख शिष्य चंदा बाला को शिक्षादीक्षा पर।
पूर्व कुलपति डॉक्टर फारूक अली ने कहा कि भगवान महावीर और भगवान बुद्ध दोनों ही प्रकृति प्रेमी थे आज हम प्रकृति विरोधी हो गए हैं। मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ मनोज ने अपनी बात रखते हुए बताया प्रतिरोध एवं बात बदलाव के कारण अलग-अलग धर्म की उत्पत्ति हुई है। लोकतंत्र तभी जिंदा रहेगा जब अस्ति को शिकार किया जाएगा और तभी समाज में शांति और अहिंसा स्थापित हो सकती है।
अंत में अध्यक्ष दिया भाषण देते हुए प्रकाश चंद्र गुप्ता ने बताया कि सभी धर्म को समेट कर रखने की विशेषता जैन धर्म में है जैन धर्म में क्षमादान की परंपराजनियों के अंतर्गत आज तक व्याप्तहै।
धनिया धन्यवाद ज्ञापन डॉक्टर जयंत जलद ने किया।
इस अवसर पर शहर के बहुत सारे समाज कमी विद्वत जन उपस्थित थे।प्रो. मनोज अनीता शर्मा वीणा सिन्हा पूनम देवी मोहम्मद तकी अहमद जावेद डॉ उमेश प्रसाद नीरज एनुअल हुड्डा साहब महबूब आलम मोहम्मद बाकी हुसैन राजकुमार की अनंत शर्मा जमुई के भाव आनंद जी डॉक्टर जयंत जलत जी वासुदेव भाई प्यारी देवी मोहम्मद शाहबाज मोहम्मद फिरोज पत्रकार प्रसून लटकांता जी सच्चिदानंद किरण पूनम श्रीवास्तव डॉक्टर फारूक अली आनंद शर्मा परस कुंज के साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी मौजूद थे।

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