एनटीपीसी फ्लाईऐश डंपिंग में करोड़ों का फर्जीवाड़ा, ट्रांसपोर्टर और अधिकारी पर मिलीभगत के आरोप

बिलासपुर से संवाददाता महेंद्र सिंह राय

बिलासपुर। एनटीपीसी सीपत प्लांट से निकलने वाले राखड़ (फ्लाईऐश) के परिवहन और डंपिंग में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। ट्रांसपोर्टर और एनटीपीसी के अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का खेल खुलेआम चल रहा है।

जानकारी के मुताबिक, प्लांट से निकलने वाली फ्लाईऐश को 120 से 130 किलोमीटर दूर निर्धारित स्थान पर डंप किया जाना चाहिए। लेकिन ट्रांसपोर्टर और अधिकारियों की सांठगांठ से इसे महज 15 से 20 किलोमीटर की दूरी पर खदानों में फेंक दिया जा रहा है। जबकि कागजों में 120 से 130 किलोमीटर की दूरी तय करना दिखाकर भारी-भरकम बिल पास करवाए जा रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि ट्रांसपोर्टर ट्रकों में लगे जीपीएस को कार में रखकर ऑनलाइन दूरी पूरी दिखाते हैं। इतना ही नहीं, नेशनल हाईवे पर आने वाले टोल टैक्स की फर्जी रसीदें भी भुगतान के लिए लगाई जा रही हैं। इस तरह रोज़ाना सैकड़ों ट्रकों के जरिए फर्जी परिवहन दिखाकर करोड़ों रुपये का घोटाला किया जा रहा है।

मामले की शिकायत अवैध राखड़ परिवहन के रूप में मस्तूरी थाने में दर्ज कराई गई है। पुलिस ने ट्रांसपोर्टर और एनटीपीसी अधिकारियों के खिलाफ जांच कर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

गौरतलब है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में आर्शीवाद ट्रांसपोर्ट का नाम सामने आया है, जिसके प्रोप्राइटर मोनू राजपाल, निवासी बिल्हा (जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़) बताए जा रहे हैं। फ्लाईऐश डंपिंग का यह खेल न सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि सरकारी खजाने को भी भारी चूना लगा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्र सरकार और एनटीपीसी प्रबंधन को तत्काल उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए ताकि इस तरह की मिलीभगत और भ्रष्टाचार पर रोक लग सके।

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