मुजफ्फराबाद/इस्लामाबाद,
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। लंबे समय से उपेक्षा और आर्थिक संकट झेल रही जनता अब सड़कों पर उतर आई है। मुजफ्फराबाद, रावलकोट, नीलम घाटी, कोटली और अन्य प्रमुख इलाकों में हजारों लोग प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार और पाकिस्तान की नीतियों के खिलाफ जमकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए सड़कों पर मार्च निकाल रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार उन्हें रोजमर्रा की ज़रूरतें पूरा करने में विफल रही है। महंगाई, बेरोजगारी और बिजली-पानी की लगातार किल्लत ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। ऊपर से सुरक्षाबलों द्वारा दमनकारी रवैया अपनाए जाने से लोगों में गहरी नाराजगी है।
महंगाई और दमन के खिलाफ जनता का गुस्सा
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार की नीतियों से नाराज लोग लगातार यह मांग कर रहे हैं कि पीओके की जनता को बराबरी के अधिकार दिए जाएं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी सत्ता और प्रशासन उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक मानकर उनके संसाधनों का शोषण कर रहा है।
एक प्रदर्शनकारी ने स्थानीय चैनल से बात करते हुए कहा,
“हम बिजली पैदा करते हैं, लेकिन हमें ही अंधेरे में रखा जाता है। हमारे बच्चों के पास रोजगार नहीं है, हमारे घरों में रोटी नहीं है, और सरकार हमारे सवालों का जवाब देने की बजाय हमें गोली और डंडे से दबाना चाहती है।”
महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार प्रदर्शन सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा भी विरोध में शामिल हो रहे हैं। महिलाएं रसोई गैस, खाद्य पदार्थों और जरूरी वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों के खिलाफ आवाज उठा रही हैं। वहीं, युवा बेरोजगारी और भविष्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितताओं से परेशान हैं।
सुरक्षा बलों से झड़प, हालात तनावपूर्ण
कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प की भी खबरें सामने आई हैं। सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए। सूत्रों का कहना है कि कई प्रदर्शनकारी घायल भी हुए हैं, हालांकि पाकिस्तानी प्रशासन इसकी पुष्टि करने से बच रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में यह असंतोष कोई अचानक की घटना नहीं है। पिछले कई सालों से यहां के लोग लगातार इस बात की शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें पाकिस्तान सरकार से न्याय नहीं मिल रहा। क्षेत्रीय संसाधनों का इस्तेमाल पाकिस्तान करता है, लेकिन उसके बदले स्थानीय लोगों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिलतीं।
भारत पहले से ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर अपना दावा जताता रहा है। नई दिल्ली की ओर से यह कहा जाता रहा है कि पीओके की जनता पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों के कारण त्रस्त है। कूटनीतिक हलकों का मानना है कि भारत इस मौजूदा विरोध प्रदर्शनों को पाकिस्तान की नीतियों की विफलता के रूप में दुनिया के सामने रख सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी तक किसी बड़ी शक्ति ने इस पर औपचारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान के लिए यह स्थिति और कठिन हो सकती है, क्योंकि वह पहले से ही आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय दबाव झेल रहा है।
वर्तमान हालात को देखते हुए विशेषज्ञ आशंका जता रहे हैं कि विरोध आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज़ हो सकता है। जनता की नाराजगी गहरी होती जा रही है और यदि सरकार ने तुरंत राहत और संवाद की पहल नहीं की तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
