पटना में अंबेडकर दलित-आदिवासी अधिकार संवाद: मुस्ताक आलम ने समाज के कमजोर वर्गों के लिए समान अवसर की दी गारंटी

ताज़ा पत्रिका  पटना वेटरनरी कॉलेज प्रांगण में आयोजित अंबेडकर दलित-आदिवासी अधिकार संवाद में ठाकरगंज विधानसभा 53 से राजद के भाभी प्रत्याशी मुस्ताक आलम सैकड़ों आदिवासियों के साथ उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि यदि राजद की सरकार बनती है, तो नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा बताए गए सभी अधिकार और सुविधाएं पूरी तरह लागू की जाएंगी।

इस अवसर पर मुस्ताक आलम ने आदिवासी और दलित समुदायों के अधिकारों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता समाज के पिछड़े और कमजोर वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।

कार्यक्रम में दलित समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री श्री शिव चंद्र राम भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी गई कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अति-पिछड़ा वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्च अधिकार प्राप्त समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति साल में चार बार बैठक आयोजित करेगी।

सरकारी सेवाओं में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए समानुपातिक आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा और पदोन्नति तथा नियुक्तियों में किसी भी प्रकार के भेदभाव को तत्काल समाप्त किया जाएगा। साथ ही, आबादी के अनुपात में आरक्षण की 50% सीमा बढ़ाने के लिए विधानमंडल द्वारा पारित कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने हेतु केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

शैक्षिक समानता सुनिश्चित करने के लिए ‘डॉ. अंबेडकर शैक्षिक समावेश योजना’ लागू की जाएगी, जिसमें आवश्यक बजट और मानव संसाधन की व्यवस्था की जाएगी। अनुसूचित जाति और जनजाति के 200 युवाओं को प्रतिवर्ष विदेश में उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। अत्याचार रोकने के लिए राज्य स्तरीय निगरानी समिति का गठन बिहार उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश की अध्यक्षता में किया जाएगा।

मनरेगा कानून के तहत कृषि भूमि में अनुसूचित जातियों और जनजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी। युवाओं के कौशल विकास के लिए 5,000 करोड़ रुपये का अनुसूचित जाति/जनजाति कोष स्थापित किया जाएगा। सरकारी नियुक्तियों में असमानता को अवैध घोषित किया जाएगा और भूमिहीनों को सहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।

निजी स्कूलों में आरक्षित सीटों का आधा हिस्सा अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा/अति-पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होगा। इसके अलावा, 25 करोड़ रुपये तक के सरकारी ठेके और निजी शिक्षा संस्थानों में 50% आरक्षण की गारंटी दी जाएगी। आरक्षण की निगरानी के लिए विशेष अधिकारप्रणाली लागू की जाएगी और इसमें किसी भी परिवर्तन के लिए केवल विधानमंडल की अनुमति आवश्यक होगी।

अनुसूचित जाति-जनजाति के अधिकारों की रक्षा और संवर्धन करने वाले दलित योद्धाओं को अंबेडकर लेमानी का दर्जा देकर पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक विभाग में संबंधित कैबिनेट मंत्री की अध्यक्षता में सात सालाना बैठक आयोजित की जाएगी।

इस संवाद के माध्यम से राज्य में दलित और आदिवासी समुदायों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में मजबूत कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई गई।

 

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