भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए रखना ही कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है।

 

रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/ बिहार।

आनन्दराम ढांढनियाँ सरस्वती विद्या मंदिर, भागलपुर के केशव सभागार में शिशु वाटिका खंड के भैया-बहनों एवं उनके माता-पिता के बीच “मातृ-पितृ दिवस” का उत्सव अत्यंत धूमधाम एवं भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ आगत माता-पिता, पुत्र-पुत्रियों तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य सुमंत कुमार द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर नन्हे-मुन्ने भैया-बहनों ने अपने माता-पिता के चरण धोकर उन्हें आसन पर बैठाया, श्रद्धापूर्वक आरती उतारी तथा पुष्पवर्षा कर सम्मान प्रकट किया। बच्चों ने माता-पिता की परिक्रमा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर कार्यक्रम के उद्देश्य में आत्मीयता एवं मिठास घोल दी।
इस भावनात्मक आयोजन के माध्यम से छोटे-छोटे बच्चों ने यह सशक्त संदेश दिया कि वे भारतीय (हिन्दू) संस्कृति एवं संस्कारों को हर हाल में जीवंत बनाए रखेंगे। उन्होंने यह भाव व्यक्त किया कि माता-पिता ही हमारे प्रथम गुरु, पथप्रदर्शक एवं शुभचिंतक होते हैं तथा उनका सम्मान एवं आशीर्वाद जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम को जीवंत एवं सफल बनाने हेतु अनेक रंगमंचीय प्रस्तुतियाँ आयोजित की गईं, जिनमें अभिभावकों की भी सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।
उक्त अवसर पर प्रधानाचार्य श्रीमान सुमंत कुमार जी ने अपने संबोधन में कहा कि “मातृ-पितृ दिवस” का आयोजन विद्यालय के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि माता-पिता हमारे जीवन के प्रथम गुरु एवं पथप्रदर्शक हैं और उनका सम्मान करना हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपने माता-पिता के प्रति प्रेम, श्रद्धा एवं सम्मान को सजीव रूप में अभिव्यक्त किया है, जो हम सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालय विद्यार्थियों को ऐसे ही संस्कारों एवं मूल्यों की शिक्षा देने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है, ताकि वे जीवन में सफलता प्राप्त कर समाज के आदर्श नागरिक बन सकें।

प्रधानाचार्य सुमंत कुमार।

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