संवाददाता शुभम कुमार भागलपुर
भागलपुर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवान मानव बलों की कमी के चलते 12-12 घंटे काम कर रहे हैं। इस कारण उनके भीतर तनाव बढ़ रहा है। इसी वजह से यात्री सुरक्षा के नाम पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं यही कारण है कि रेलवे कर्मचारियों के साथ-साथ आरपीएफ जवानों की काउंसलिंग कर उनकी समस्याएं जानी जा रही है ताकि उसे दूर करने पर काम किया जा सके सुरक्षा से जुड़ी जानकारी के लिए आरपीएफ के डीआईजी सह पूर्व रेलवे के मुख्य सुरक्षा आयुक्त रफीक अहमद अंसारी रेलवे स्टेशन पहुंचे उन्होंने आरपीएफ जवानों से उनकी समस्याएं पूछी इस पर जवानों ने काम के बोझ को खुलकर साझा भी किया स्टेशन के पहली मंजिल पर बने सभागार में उन्होंने आरपीएफ जवानों के साथ बैठक की बैठक में जवानों ने डीआईजी के सामने ड्यूटी के हिस्से आने वाली परेशानियों को रखा इसी के साथ सालों से यूनिट नहीं बदले जाने की बात रखी, जिस पर डीआईजी ने जवानों से कहा कि आरपीएफ की चुनौतियां बहुत हैं यात्रियों की अपेक्षा के अनुसार ही हमें काम करना चाहिए
आरपीएफ जवानों के लिए स्टेशन पर फेस रिकग्निशन युक्त कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे आसानी से अपराधी पहचान में आ सके स्टेशन पर आईपी आधारित सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएंगे कैमरे लगाए जा चुके हैं इसका सुरक्षा निरीक्षण अधिकारी बार-बार कर रहे हैं। कैमरों के लिए रेलटेल के साथ एक एमओयू किया गया था रेलवे परिसरों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए स्टेशनों के सीसीटीवी कैमरों और वीडियो फीड की निगरानी 3 स्तरों पर की जा रही है।सुरक्षा कार्यशाला के माध्यम से जवानों से हो रही बात DIG ने बताया कि चुनाव जैसे मौके पर जिम्मेदारियां बढ़ती हैं हर साल जवान रिटायर हो रहे हैं लेकिन नई भर्ती आने में चार से पांच साल लग जाते हैं। परेशानी होने पर जवानों पर काम का बोझ बढ़ता है। सभी जगह सुरक्षा कार्यशाला के माध्यम से जवानों से बात की जा रही है, जिसमें काउंसलिंग भी इसी का हिस्सा है। महिलाओं के साथ हुए अपराधों पर डीआईजी ने कहा कि आरपीएफ इंस्पेक्टर को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बैरक, मेस और रिकॉर्ड रूम की साफ-सफाई व रखरखाव को भी बारीकी से देखा
