गोराडीह अंचल से फर्जी दस्तावेज़ के आधार पर दाखिल-खारिज कराने के प्रयास का एक गंभीर मामला सामने आया है।

संवाददाता शुभम कुमार भागलपुर

भागलपुर जिले के गोराडीह अंचल से फर्जी दस्तावेज़ के आधार पर दाखिल-खारिज कराने के प्रयास का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में प्रदीप प्रकाश उर्फ प्रदीप सिंह ने अंचलाधिकारी, गोराडीह को लिखित शिकायत देकर दोषियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता प्रदीप प्रकाश उर्फ प्रदीप सिंह, पिता—स्व. विष्णु प्रसाद सिंह उर्फ बिशन मंडल, ग्राम-पोस्ट विशनपुर जिन्या, थाना लोदीपुर, अंचल गोराडीह, जिला भागलपुर के स्थायी निवासी हैं। वर्तमान में वे दुर्गानगर, छोटा गोविंदपुर, जमशेदपुर (झारखंड) में रह रहे हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि उनकी पैतृक संपत्ति को हड़पने की नीयत से कुछ लोगों द्वारा सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर दाखिल-खारिज कराने का प्रयास किया गया।

प्रदीप प्रकाश का आरोप है कि आशा सिन्हा उर्फ माया देवी द्वारा फर्जी दस्तावेज़, कूटरचित हस्ताक्षर और फर्जी वंशावली लगाकर उनकी जमीन को अपने नाम कराने की कोशिश की गई। उन्होंने बताया कि यह पूरा प्रयास पूरी तरह से अवैध और आपराधिक प्रकृति का है, जिससे उन्हें न केवल आर्थिक नुकसान की आशंका है, बल्कि लंबे समय से मानसिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ रहा है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस कथित अवैध कृत्य में आशा सिन्हा उर्फ माया देवी के पति सीताराम सिंह और उनके पुत्र सुमित कुमार सिंह ने सक्रिय रूप से सहयोग किया। इसके अलावा फर्जी दस्तावेज़ तैयार कराने और पूरे प्रकरण को अंजाम देने में कैलाश मंडल, कृष्णा मंडल उर्फ बबलू (निवासी—जिच्चो/विशनपुर) तथा लोदीपुर के सरपंच संजीव कुमार की भी महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है।

पीड़ित ने इस मामले को लेकर कहलगांव विधायक शुभानन्द मुकेश और अंचलाधिकारी, गोराडीह से आग्रह किया है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वाले सभी व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि फर्जी दस्तावेज़ के सहारे जमीन हड़पने जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सके।

यह मामला एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि भूमि से जुड़े मामलों में दस्तावेज़ों की सख़्त जांच और प्रशासनिक सतर्कता कितनी आवश्यक है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और पीड़ित को न्याय दिलाने में कितना सफल होता है।

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