गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र भागलपुर की ओर से प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी बाबू दीप नारायण सिंह के जयंती की पूर्व संध्या पर उनकी “स्मृति दिवस समारोह” का आयोजन

संवाददाता शुभम कुमार भागलपुर/बिहार

“डॉक्टर सुनील अग्रवाल की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ मनोज कुमार, पूर्व कुलपति अंतरराष्ट्रीय गांधी हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा, मुख्य वक्ता डॉ रवि शंकर कुमार चौधरी,अध्यक्ष ,इतिहास विभाग,टी एन बी कॉलेज भागलपुर, विशिष्ट अतिथि डॉक्टर मनोज मिता थे।
कार्यक्रम का संचालन संजय कुमार और धन्यवाद ज्ञापन अध्यक्ष प्रकाश चंद्र गुप्ता द्वारा किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि बाबू दीप नारायण सिंह भागलपुर के उन महान विभूतियां में से एक थे, जिन्होंने अपनी जिंदगी, अपनी संपत्ति और अपना सर्वस्व बिना किसी स्वार्थ के देश की जनता को अर्पित कर दिया। उनके त्याग और समर्पण का ही परिणाम है कि आज भागलपुर शिक्षा का हब बन गया है। उनके महत्वपूर्ण योगदान को याद करने, संजोने और फैलाने की आवश्यकता है। उनके द्वारा किए गए कुछ महत्वपूर्ण कार्य आज भी भागलपुर के लिए प्रेरणा स्रोत बना हुआ है।
मुख्य वक्ता डॉक्टर रवि शंकर कुमार चौधरी ने उनके संपूर्ण जीवन वृतांत की चर्चा करते हुए कहा कि वेआधुनिक भागलपुर के कर्ण थे। जिन्होंने अपना सर्वस्व दान कर दिया।उन्होंने दो महत्वपूर्ण आंदोलन में अपनी माहिती भूमिका निभाई थी। एक 1905 में स्वदेशी आंदोलन और दूसरा 1920 में असहयोग आंदोलन ।जिसमें उन्होंने न केवल बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया अपितु उसका नेतृत्व भी किया था।
1920 में जब गांधी जी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन चल रहा था तव उनकी पहली मुलाकात गांधीजी से हुई थी ।तब से वे आजीवन खादी पहनने का संकल्प लिए थे। मात्र 13 वर्ष की अवस्था में कांग्रेस महा अधिवेशन में उन्होंने भाग लिया था।वहीं उनकी मुलाकात डॉक्टर सच्चिदानंद सिन्हा से हुई थी। उन्होंने कहा कि सविनय अवज्ञा आंदोलन बिहार के चंपारण से प्रारंभ किया गया जिसके प्रेरणा स्रोत महात्मा गांधी थे और उनके संरक्षण में इन्होंने उस आंदोलन में महती भूमिका निभाई थी। वे लाला लाजपत राय के विचारों से भी काफी प्रभावित थे। इसीलिए तो जब 1928 में लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई उसके पश्चात उन्होंने उनके सम्मान में 32 एकड़ जमीन लाजपत पार्क के नाम कर दिया था। 1934 के मुंगेर भूकंप का जिक्र करते हुए गांधी जी ने कहा था की दरभंगा महाराज के पश्चात भूकंप पीड़ितों की सहायता के लिए दूसरा सबसे अधिक दान देने वाले व्यक्तियों में बाबू दीप नारायण सिंह थे। आज उनकी स्मृति के कई भग्नावशेष भागलपुर में विद्यमान है, लेकिन वह जीर्ण शिर्ण अवस्था को प्राप्त कर रहे हैं ,इसलिए आवश्यकता है कि उनके किए हुए कार्यों का संरक्षण हो और संवर्धन हो।वे भागलपुर के लिए प्रेरणा स्रोत थे।ऐसे प्रेरक व्यक्तित्व को इतिहास ने भी उचित सम्मान नहीं दिया है। वे एक जीवंत विचार थे ।उनका संदेश है कि जो पाया है वह लोगों को और अधिक बड़ा बनाकर लौटा दो।
मुख्य अतिथि डॉक्टर मनोज कुमार ने कहा कि उनके किए हुए कार्य और विचार को संकलित करने की आवश्यकता है और उनके बहाने भागलपुर के तमाम स्वतंत्रता सेनानियों को भी संकलित करने की आवश्यकता है।स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में भागलपुर का क्या योगदान रहा है और कालखंड में वह किस तरह से भागलपुर और देश के लिए उपयोगी हो सकता है इस पर चिंतन करने की आवश्यकता है ।उन्होंने कहा की जिला प्रशासन और नगर निगम से यह मांग किया जाना चाहिए की बाबू दीप नारायण सिंह के द्वारा दी गई संपत्ति जिन उद्देश्यों के लिए दिया गया था वह उसी रूप में उपयोग हो और जो कुछ भी यत्र तत्र बिखरे पड़े हैं उनको संरक्षित करने का कार्य किया जाए ।
सर्वसम्मति से यह घोषणा किया गया कि बाबू दीप नारायण सिंह के द्वारा किए गए कार्य और उनको विचारों को लिपिबद्ध कर आने वाले 26 जनवरी 2027 को प्रकाशित किया जाए इसके लिए विद्वान प्राध्यापक डॉ रवि शंकर कुमार चौधरी और डॉक्टर उमेश प्रसाद नीरज को दायित्व दिया गया।
इस कार्यक्रम में डॉक्टर मनोज मिता और प्रकाश चंद्र गुप्ताके द्वारा उनके संस्मरण रखे गए।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोगों में राम रतन चूड़ी वाला, वासुदेव भाई, डॉक्टर अरविंद कुमार ,की एन वी कॉलेज, राज कुमार, डॉ उमेश प्रसाद नीरज,मोहम्मद बाकीर हुसैन,मोहम्मद तकी अहमद जावेद,डॉक्टर शशी रंजन निराला,बीणा सिंहा,डॉक्टर रामरेखा प्रसाद सिंह,बृजेश शाह, कमल जायसवाल,डॉक्टर दिनेश, डॉ पी एन रंजन, इंजीनियर शशि रंजन निराला, सहित अनेकों लोग थे।

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