बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, बुद्धि, स्मरण शक्ति एवं शारीरिक विकास को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आनन्दराम ढांढनियाँ सरस्वती विद्या मंदिर, भागलपुर में सुवर्ण प्राशन कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया

रिपोर्ट – अमरजीत कुमार तिवारी भागलपुर/बिहार

सुवर्ण प्राशन आयुर्वेद की एक प्राचीन एवं प्रमाणित पद्धति है, जिसमें शुद्ध स्वर्ण भस्म, औषधीय जड़ी-बूटियाँ, शहद एवं घृत का विशेष संयोजन बच्चों को दिया जाता है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से 0 से 12 वर्ष तक के बच्चों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
कार्यक्रम मे प्रधानाचार्य सुमंत कुमार ने बताया कि सुवर्ण प्राशन से बच्चों की इम्युनिटी बढ़ती है, बार-बार होने वाले संक्रमण से बचाव होता है तथा बौद्धिक एवं मानसिक विकास में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। साथ ही यह पाचन शक्ति, वाणी विकास एवं सीखने की क्षमता को भी मजबूत करता है।
इस अवसर पर वाटिका प्रमुख अनिता सिन्हा ने कहा कि
“आज के बदलते पर्यावरण में बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए सुवर्ण प्राशन एक सुरक्षित और प्रभावी आयुर्वेदिक उपाय है। नियमित रूप से दिया गया सुवर्ण प्राशन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता है।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने भाग लिया और अपने बच्चों को सुवर्ण प्राशन का लाभ दिलाया। अभिभावकों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे बच्चों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
श्वेता सौरभ ने जानकारी दी कि आयुर्वेदिक शास्त्रों के अनुसार पुष्य नक्षत्र के दिन यह कार्यक्रम प्रत्येक माह नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य सुमंत कुमार, वाटिका प्रमुख अनिता सिन्हा, मातृभारती की अध्यक्षा मधु प्रिया,अभिभाविका सत्या, और श्वेता सौरभ जी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। उक्त अवसर पर ममता झा, आरती झा,रुपम रानी, निशांत कुमार, राजेश्वरी देवी,ईरा सिन्हा, बबीता, दिवाकर पांडेय, गोपाल, दिव्या, रिंकु के साथ ही साथ बड़ी संख्या में अभिभावकगण की उपस्थिति रही।

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