ठाकुरगंज (किशनगंज)
नेपाल में हो रही लगातार भारी बारिश और कोसी ब्रिज से छोड़े गए अतिरिक्त पानी के कारण ठाकुरगंज प्रखंड के भातगांव पंचायत क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। गलगलिया बॉर्डर बाजार, भकसर, भिटा, बसमनी, ईदगाह टोला, थारोथादनी, निम्मागुड़ी, नेंगरा डूबा, कुर्लीकोर्ट, खटखटी और झाला बस्ती सहित मेची नदी से सटे अधिकांश गांवों में जलजमाव की स्थिति भयावह हो गई है।
ग्रामीणों के मुताबिक मेची नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और कई स्थानों पर तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है। नदी के किनारे मिट्टी धंसने लगी है, जिससे आसपास के इलाकों में कटाव का खतरा मंडरा रहा है। गांवों में घुसा पानी न केवल फसलों को बर्बाद कर रहा है, बल्कि घरों और सड़कों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। कई कच्चे मकान ढह गए हैं और सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है।
किसानों की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ गई हैं। इस बाढ़ ने उनकी मेहनत और आशाओं पर पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी धान, केला, चाय और सब्जियों की फसलें पूरी तरह से डूब चुकी हैं। कई किसानों ने बताया कि उन्होंने इस सीजन में कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन अब सबकुछ बर्बाद हो गया है। किसान जमशेद,जहांगीर,जाबिर ने बताया, “हमने बड़ी उम्मीद से धान की फसल लगाई थी, लेकिन पानी में सब डूब गया। अब घर चलाना मुश्किल हो गया है।”
भातगांव पंचायत का नजारा बेहद दर्दनाक है। यहां के अधिकांश घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। घरों में पानी भर जाने से ग्रामीणों को खुले में रहना पड़ रहा है। खाना बनाना और पीने के लिए साफ पानी मिलना भी मुश्किल हो गया है। महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई जगहों पर लोग नाव या ट्रैक्टर की मदद से आवाजाही कर रहे हैं।
गांव की गलियों में पानी जमा होने से बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। मच्छरों का प्रकोप तेज हो गया है और लोग बुखार, त्वचा रोग जैसी परेशानियों की शिकायत कर रहे हैं। गांवों में स्वच्छता की स्थिति भी बिगड़ चुकी है।
स्थानीय ने प्रशासन से किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द राहत नहीं पहुंचाई गई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, आपदा प्रबंधन विभाग ने टीमों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है।
फिलहाल, ठाकुरगंज और भातगांव पंचायत के लोग भय और असहायता के बीच दिन गुजारने को मजबूर हैं। बाढ़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि नेपाल से आने वाली नदियों के उफान पर नियंत्रण के ठोस उपाय न किए जाने तक सीमावर्ती गांव हर साल इस तरह की तबाही झेलते रहेंगे।
