विश्वविद्यालय इतिहास विभाग में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर समारोह आयोजित किया गया।
संवाददाता शुभम कुमार भागलपुर/ बिहार
विश्वविद्यालय इतिहास विभाग में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो.(डां.)अर्चना कुमारी साह, डाॅ आनंद कुमार झा, डॉ के.के.मंडल, डाॅ मल्लिका मंजरी, डाॅ रविशंकर कुमार चौधरी, डाॅ अंजना कुमारी, डाॅ सोनी कुमारी एवं सत्र 2024-26 एवं 2025-27 के छात्र- छात्राएं उपस्थित थे।
विभागाध्यक्षा ने अपने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज आपको खुद को बदलना होगा। हक के लिए अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। पुत्र के बराबर अपने हक के लिए लड़े। आगे पढ़ना और कुछ करना है तो अपने माता-पिता को प्यार से समझाएं।
डाॅ मल्लिका मंजरी ने महिलाओं के अधिकार और उनकी स्थिति में सुधार के लिए किये गये प्रयासों और वर्तमान में ईरान आदि कई देशों में महिलाओ द्वारा किये गए आंदोलन एवं उनकी मांगों की चर्चा की।
डाॅ.रविशंकर कुमार चौधरी ने भारतीय इतिहास में महिलाओ की भूमिका, उनकी स्थिति में सुधार, राष्ट्रीय आंदोलन में महिलाओ की भूमिका, महिलाओ के लिए समय-समय पर लाये गए कानून, महिलाओ की रोजगार में भागीदारी, लैंगिक समानता आदि विषयों पर चर्चा की।
वरीय सह प्राध्यापक डॉ.कृष्ण कुमार मंडल के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाये जाने के कारणों पर चर्चा किया गया। सिमोन बुआ की कृति द सेकंड सेक्स से उग्र नारीवादी आंदोलन को और भी बल मिला। डाॅ.आनंद कुमार झा एवं डाॅ सोनी ने शिक्षा को महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा साधन बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.)अर्चना कुमारी साह के द्वारा किया गया और मंच संचालन डॉ.मल्लिका मंजरी ने की। सत्र 2024-26 की नुपुर कुमारी ने महिलाओ के संघर्ष पर स्वरचित कविता पढी। विभागाध्यक्ष ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की सबों को बधाई दी।
