बिलासपुर: वनपाल पर वनरक्षक को फोन पर भद्दी गालियां और नौकरी से निकालने की धमकी देने का आरोप, डीएफओ से शिकायत
बिलासपुर (छत्तीसगढ़):
बिलासपुर वनमंडल में अनुशासन और मर्यादा को तार-तार करने वाला एक मामला सामने आया है। बीटकूला परिसर में पदस्थ एक वनरक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) ने उड़नदस्ता दल में पदस्थ एक वनपाल (फॉरेस्टर) पर फोन पर अत्यंत अश्लील गालियां देने और पद का दुरुपयोग कर नौकरी से बर्खास्त करवाने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित कर्मचारी ने इस संबंध में वन संरक्षक (सीएफ़) बिलासपुर वृत्त को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता वनरक्षक चंद्रहास तिवारी (परिसर रक्षक, बीटकूला) के अनुसार, घटना 14 अप्रैल 2026 की शाम करीब 6:08 बजे की है। आरोप है कि वनपाल लोकमणी त्रिपाठी ने उनके मोबाइल पर फोन किया और उन्हें अगले दिन डिप्टी रेंजर के साथ एसडीओ (SDO) के घर पहुंचने का निर्देश दिया। जब वनरक्षक ने सामान्य भाव से एसडीओ के घर का पता पूछा, तो कथित तौर पर वनपाल उग्र हो गए।
जांच के नाम पर प्रताड़ना का आरोप
पत्र में उल्लेख है कि वर्तमान में चल रही ‘बीट जांच’ के दौरान मिले ‘ठूंठों’ (कटे हुए पेड़ों के अवशेष) को लेकर वनपाल लगातार दबाव बना रहे थे। जब वनरक्षक ने यह कहा कि “क्या आप जांच में मिले सभी ठूंठों का इल्जाम मुझ पर लगाना चाह रहे हैं?”, तो आरोप है कि वनपाल लोकमणी त्रिपाठी अपना आपा खो बैठे।
अभद्र भाषा और धमकी
पीड़ित का आरोप है कि वनपाल ने फोन पर उन्हें “सस्पेंडेड” बताते हुए मां-बहन की अत्यंत गंदी और भद्दी गालियां दीं। शिकायत के अनुसार, वनपाल ने यहाँ तक कह दिया कि— “अब तू अपने आप को बचा, अगर तेरा डिस्मिस (बरखास्तगी) नहीं करा दिया तो मेरा नाम मेहेत्तर कर देना।”
डर और अपमान के कारण वनरक्षक ने फोन काट दिया, जिसके बाद उन्हें दोबारा फोन किया गया जिसे उन्होंने डर के मारे
संवाददाता -महेंद्र सिंह राय
