भिलौनी बना “मिट्टी माफिया” का अड्डा : शिवनाथ नदी का सीना चीर रहा राधे केवट, अवैध पंजा भट्ठा धधक रहा बेखौफ, प्रशासन बना मूकदर्शक
बिलासपुर/पचपेड़ी – पचपेड़ी क्षेत्र के ग्राम पंचायत भिलौनी में इन दिनों अवैध उत्खनन का ऐसा खूनी खेल चल रहा है कि गांव वालों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। आरोपों के घेरे में है गांव का राधे केवट, जिसने नियम-कानून, पर्यावरण और शासन के डर को जूते की नोक पर रखकर शिवनाथ नदी के किनारे अवैध पंजा भट्ठा खड़ा कर दिया है। और हैरानी की बात ये कि ये भट्ठा पूरी रफ्तार से धधक रहा है, मानो किसी को किसी का खौफ ही न हो।
*नदी किनारे जेसीबी का कहर, ट्रैक्टरों की कतारें*
ग्रामीणों का कहना है कि राधे केवट ने जेसीबी मशीन को अपना हथियार बना लिया है। सुबह से शाम तक शिवनाथ नदी के किनारे धड़ल्ले से मिट्टी खोदी जा रही है। एक के बाद एक ट्रैक्टर-ट्रॉली भर-भर कर मिट्टी ढोई जा रही है और सीधे भट्ठे में झोंकी जा रही है। न कोई परमिशन, न कोई रॉयल्टी, न कोई रोक-टोक। ग्रामीण बताते हैं कि जिस बेदर्दी से किनारा खोदा जा रहा है, उससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है। किनारे धंस रहे हैं, कटाव बढ़ रहा है और बरसात में बाढ़ का खतरा गांव के सिर पर मंडराने लगा है।
*पर्यावरण की हत्या, राजस्व को लाखों का चूना*
ये सिर्फ मिट्टी की चोरी नहीं, सीधे-सीधे पर्यावरण की हत्या है। नदी किनारे की उपजाऊ मिट्टी, जो गांव की जमीन को संवारती थी, आज ईंट बनकर बिक रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नदी किनारे से इस तरह अंधाधुंध उत्खनन से जलस्तर गिरता है, पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ता है और लंबे समय में नदी का रुख तक बदल सकता है। वहीं दूसरी ओर शासन को हर साल लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है। जिस मिट्टी पर सरकार को रॉयल्टी मिलनी चाहिए थी, वो पूरी की पूरी माफिया की तिजोरी में जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि ये धंधा सालों से चला आ रहा है — हर साल बारिश खत्म होते ही वही जेसीबी, वही ट्रैक्टर और वही अवैध भट्ठा शुरू हो जाता है।
*“आंख मूंदे बैठा है प्रशासन”*–
फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
गांव वालों का सब्र अब जवाब दे चुका है। लोगों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर हो रही अवैध गतिविधि प्रशासन की नाक के नीचे चल रही है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं। “क्या अधिकारियों की आंखों पर पट्टी बंधी है, या फिर कहीं मिलीभगत है?” — ये सवाल अब हर जुबान पर है। ग्रामीणों ने खुलकर राजस्व विभाग, खनिज विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि मौके पर टीम भेजकर जांच की जाए और दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द रोक नहीं लगी तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
*सवालों के घेरे में सिस्टम*
भिलौनी की ये घटना सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करती है। जब नदी किनारे दिन-दहाड़े जेसीबी चल रही हो, धुआं उगलता भट्ठा धधक रहा हो और ग्रामीण चीख-चीख कर शिकायत कर रहे हों, तब भी अगर प्रशासन खामोश रहे तो इसे क्या कहा जाए — लापरवाही या संरक्षण?
अब गेंद प्रशासन के पाले में है। देखना होगा कि अधिकारी फाइलों में दबे इस “मिट्टी माफिया” के खिलाफ एक्शन लेते हैं या फिर हर बार की तरह आंख मूंद लेते हैं। अगर कार्रवाई नहीं हुई तो शिवनाथ नदी का किनारा बर्बाद होना तय है, और उसकी कीमत आने वाली पीढ़ियों को चुकानी पड़ेगी।
रिपोर्टर – महेंद्र सिंह राय
