राष्ट्रीय निवेश समिति के समक्ष BAU-SABAGRIs के 18 एग्री स्टार्टअप्स ने प्रस्तुत किए अत्याधुनिक कृषि नवाचार
PM-RKVY के तहत ₹5 लाख से ₹25 लाख तक की सीड ग्रांट के लिए CCS-NIAM, जयपुर में हुआ तकनीकी एवं व्यावसायिक मूल्यांकन
रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर बिहार
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर के Sabour Agri Incubators (SABAGRIs) ने कृषि नवाचार एवं एग्री-उद्यमिता के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय द्वारा इनक्यूबेट किए जा रहे 18 उच्च संभावनाशील (High-Potential) एग्री स्टार्टअप्स ने मंगलवार को चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान (CCS-NIAM), जयपुर में आयोजित Selection & Investment Committee (SIC) की बैठक में अपने अत्याधुनिक कृषि नवाचारों, तकनीक-आधारित व्यवसाय मॉडल तथा विस्तार योजनाओं का सफलतापूर्वक प्रस्तुतीकरण किया।
यह प्रस्तुतीकरण प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के अंतर्गत संचालित Innovation and Agri-Entrepreneurship Programme का एक महत्वपूर्ण चरण था, जिसके माध्यम से चयनित स्टार्टअप्स को उनके व्यवसाय के विस्तार, प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण तथा बाजार विस्तार के लिए ₹5 लाख से ₹25 लाख तक की सीड ग्रांट उपलब्ध कराई जाएगी। यह अनुदान कृषि आधारित नवाचारों को प्रयोगशाला एवं विचार स्तर से सफल व्यावसायिक उद्यमों में परिवर्तित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
बैठक में Startup Agribusiness Incubation Programme (SAIP) के 11 तथा Agripreneurship Orientation Programme (AOP) के 7 स्टार्टअप्स सहित कुल 18 स्टार्टअप्स ने भाग लिया। इन स्टार्टअप्स ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की वर्तमान चुनौतियों के समाधान हेतु विकसित अपने अभिनव उत्पादों, तकनीकों एवं व्यवसायिक मॉडलों का विस्तृत प्रदर्शन किया। प्रस्तुत नवाचारों में मखाना आधारित मूल्य संवर्धित उत्पाद, कृषि अपशिष्ट से पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद, जैव उर्वरक एवं जैविक कृषि तकनीक, पोषणयुक्त एवं फंक्शनल फूड्स, डिजिटल एग्रीटेक प्लेटफॉर्म, सटीक कृषि (Precision Agriculture), डेयरी एवं मत्स्य पालन तकनीक, माइक्रोग्रीन्स उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, सस्टेनेबल पैकेजिंग, किसानों के लिए डिजिटल सलाहकारी सेवाएँ, तथा ग्रामीण कृषि उद्यमिता से जुड़े अनेक नवाचार प्रमुख रहे।
चयन एवं निवेश समिति की अध्यक्षता देश के प्रतिष्ठित उद्योग विशेषज्ञ एवं एग्री-बिजनेस सलाहकार श्री के. वी. अय्यर ने की। समिति के सदस्य सचिव श्री आर. सी. मीणा, सहायक कृषि विपणन सलाहकार, DMI-RO, जयपुर एवं PI, PM-RKVY IEF, CCS-NIAM रहे। समिति में डॉ. श्रीधरा आर. वोलेटी (MD एवं CEO, Indraas Pvt. Ltd.), श्री रवि माथुर (Advisor, Venture Capital एवं Private Equity), डॉ. रवि कुमार गोयल (COO एवं Director, Innovation & Entrepreneurship Foundation, CCS-NIAM) तथा श्री केशर सिंह सहित उद्योग, निवेश एवं एग्री-बिजनेस क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ शामिल रहे। विशेषज्ञों ने प्रत्येक स्टार्टअप का तकनीकी नवाचार (Technology Readiness), व्यवसायिक व्यवहार्यता (Commercial Viability), वित्तीय स्थिरता (Financial Sustainability), बाजार विस्तार क्षमता (Scalability), बौद्धिक संपदा (IP Potential), निवेश आकर्षण तथा सामाजिक-आर्थिक प्रभाव जैसे विभिन्न मानकों पर विस्तृत मूल्यांकन किया।
SABAGRIs की ओर से डॉ. ए. के. सिंह, निदेशक अनुसंधान, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर एवं प्रधान अन्वेषक (Principal Investigator), SABAGRIs, डॉ. दीपक कुमार पटेल, सह-प्रधान अन्वेषक (Co-PI) तथा श्रीमती अमिता सिंह, बिजनेस मैनेजर उपस्थित रहीं। टीम ने सभी स्टार्टअप्स को तकनीकी परामर्श, व्यवसाय विकास रणनीति, निवेश प्रस्तुतीकरण (Investment Pitching), वित्तीय मॉडलिंग तथा बाजार विस्तार योजना तैयार करने में मार्गदर्शन प्रदान किया। प्रत्येक स्टार्टअप ने विशेषज्ञ समिति के समक्ष अपने उत्पाद, व्यवसाय मॉडल, बाजार रणनीति, राजस्व योजना तथा भविष्य की विस्तार रणनीति का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया।
इस अवसर पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा,
“बिहार कृषि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल वैज्ञानिक अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुसंधान आधारित प्रौद्योगिकियों को उद्यमिता, निवेश एवं रोजगार सृजन से जोड़ना भी है। SABAGRIs आज बिहार ही नहीं बल्कि पूर्वी भारत में कृषि नवाचार एवं एग्री-स्टार्टअप पारितंत्र का एक अग्रणी केन्द्र बनकर उभरा है। यहाँ विकसित स्टार्टअप्स किसानों की वास्तविक समस्याओं के वैज्ञानिक एवं तकनीकी समाधान विकसित कर रहे हैं, कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन कर रहे हैं तथा ग्रामीण युवाओं के लिए नए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर सृजित कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि ये स्टार्टअप्स राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेंगे तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।”
निदेशक अनुसंधान एवं SABAGRIs के प्रधान अन्वेषक डॉ. ए. के. सिंह ने कहा,
“SABAGRIs कृषि नवाचारों को प्रयोगशाला से बाजार (Lab-to-Market) तक पहुँचाने के लिए एक समग्र इनक्यूबेशन पारितंत्र विकसित कर रहा है। यहाँ स्टार्टअप्स को वैज्ञानिक एवं तकनीकी मार्गदर्शन, व्यवसाय विकास, बौद्धिक संपदा संरक्षण, उद्योग साझेदारी, निवेश सुविधा, उत्पाद प्रमाणीकरण, ब्रांडिंग तथा विपणन सहायता एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जाती है। PM-RKVY के अंतर्गत मिलने वाली सीड ग्रांट इन स्टार्टअप्स को अपनी तकनीकों का व्यावसायीकरण, उत्पादन क्षमता का विस्तार, निवेश आकर्षित करने तथा किसानों तक नवीन समाधान पहुँचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हमारा लक्ष्य कृषि अनुसंधान को आर्थिक समृद्धि, रोजगार सृजन एवं ग्रामीण उद्यमिता से जोड़ते हुए एक मजबूत नवाचार पारितंत्र का निर्माण करना है।”
उन्होंने आगे कहा कि SABAGRIs द्वारा विकसित इन स्टार्टअप्स के नवाचार आत्मनिर्भर भारत, स्टार्टअप इंडिया, विकसित भारत-2047, कृषि मूल्य संवर्धन, जलवायु-स्मार्ट कृषि, सतत कृषि विकास, कृषि आधारित उद्योगों के विकास तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि SABAGRIs देश के अग्रणी कृषि व्यवसाय इनक्यूबेशन केन्द्रों में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है। यह केन्द्र कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, जैव प्रौद्योगिकी, डिजिटल कृषि, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, कृषि मशीनरी तथा ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में नवाचारों को बढ़ावा देते हुए युवाओं को रोजगार सृजक (Job Creators) के रूप में विकसित कर रहा है। विश्वविद्यालय का यह प्रयास बिहार को कृषि नवाचार एवं एग्री-स्टार्टअप के राष्ट्रीय मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
समिति की अनुशंसाओं के आधार पर चयनित स्टार्टअप्स को ₹5 लाख से ₹25 लाख तक की सीड ग्रांट प्रदान की जाएगी। यह वित्तीय सहायता उनके उत्पादों के व्यावसायीकरण, उत्पादन क्षमता विस्तार, बाजार में प्रवेश, निवेश आकर्षण तथा रोजगार सृजन को गति प्रदान करेगी। इससे न केवल कृषि आधारित स्टार्टअप पारितंत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि किसानों की आय वृद्धि, ग्रामीण औद्योगिकीकरण, कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन तथा बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की भी अपेक्षा है।
