किशनगंज। जिला प्रशासन ने निजी विद्यालयों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। अभिभावकों से लगातार मिल रही शिकायतों और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर प्रशासन ने आदेश जारी करते हुए सभी निजी स्कूलों को 15 अप्रैल 2026 तक किताबों और यूनिफॉर्म की पूरी सूची जारी करने का निर्देश दिया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोई भी विद्यालय अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म, जूते, बैग या स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। ऐसा करना बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2019 का उल्लंघन माना जाएगा और दोषी संस्थानों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जबरन खरीदारी पर रोक
जारी आदेश में कहा गया है कि विद्यालय संचालक, प्राचार्य या प्रबंधन किसी भी छात्र या अभिभावक को एक ही विक्रेता या दुकान से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेंगे। यह कदम अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पांच दुकानों की सूची देना अनिवार्य
प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी निजी विद्यालय कम से कम पांच दुकानों की सूची अपने नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर प्रदर्शित करें। इससे अभिभावकों को अपनी सुविधा और बजट के अनुसार खरीदारी करने की स्वतंत्रता मिलेगी।
वेबसाइट और स्कूल में सूचना प्रदर्शित करना जरूरी
सभी स्कूलों को प्रत्येक कक्षा के लिए अनिवार्य पुस्तकों की सूची और यूनिफॉर्म का पूरा विवरण 15 अप्रैल से पहले अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। साथ ही, इसे विद्यालय परिसर के सार्वजनिक स्थान पर भी चस्पा करना अनिवार्य किया गया है।
यूनिफॉर्म में बार-बार बदलाव पर रोक
आदेश में यह भी कहा गया है कि स्कूलों को यूनिफॉर्म इस तरह तय करनी होगी कि उसमें कम से कम तीन वर्षों तक कोई बदलाव न किया जाए। इससे हर साल नई ड्रेस खरीदने का अतिरिक्त बोझ अभिभावकों पर नहीं पड़ेगा।
उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर स्कूल के प्राचार्य, संचालक, प्रबंधक और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सभी सदस्य जिम्मेदार होंगे। अधिनियम की धारा-7 के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
निगरानी के लिए अधिकारी नियुक्त
जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो स्कूलों का निरीक्षण करेंगे और किसी भी अनियमितता की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपेंगे।
अभिभावकों को मिली राहत
इस फैसले का अभिभावक संगठनों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से निजी स्कूलों द्वारा कमीशनखोरी और जबरन खरीदारी के कारण परिवार आर्थिक रूप से परेशान थे। नए आदेश से उन्हें राहत मिलेगी और वे खुले बाजार से सस्ती दरों पर सामान खरीद सकेंगे।
प्रशासन का मानना है कि इस पहल से शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी, किफायती और सुलभ बनेगी।
