रिपोर्ट – अमित कुमार
भागलपुर। गंगा तट बरारी घाट स्थित भोलेनाथ मंदिर के पास रविवार को श्रद्धालुओं ने एक अद्भुत दृश्य देखा। मंदिर परिसर के आसपास नाग-नागिन का जोड़ा दिखाई दिया। हिंदू मान्यताओं के अनुसार नाग देवता पूजनीय माने जाते हैं और शिवजी के गले में भी नाग का वास माना जाता है। इस दृश्य को देखकर श्रद्धालुओं ने इसे शुभ संकेत मानते हुए दूर से ही नाग देवता की पूजा-अर्चना की।
गंगा किनारे चंद्र ग्रहण के बाद स्नान व दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। आज बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचे और पितृपक्ष के आरंभ पर अपने पूर्वजों को जल तर्पण किया। श्रद्धालु राजेश कुमार पांडे और उनके पुत्र आयुष्मान पांडे ने बताया कि पितृपक्ष के आरंभ पर श्राद्ध व तर्पण की परंपरा निभाई जाती है। पूर्वजों को स्मरण कर जल अर्पित करने से आत्मिक शांति मिलती है और परिवार के लिए कल्याणकारी माना जाता है।
आयुष्मान पांडे ने जानकारी दी कि कई यजमानों ने श्रद्धापूर्वक अपने पूर्वजों का तर्पण किया। वहीं घाट के किनारे स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना भी की गई। श्रद्धालुओं ने अपने परिवार की शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और व्यापारिक स्थिति में सुधार के लिए भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की। साथ ही मंदिर परिसर में दिखे नाग-नागिन के जोड़े को भी भोलेनाथ के प्रतीक मानकर श्रद्धा भाव से नमन किया।
