दूल्हे को कंधे और नाव के सहारे पार करनी पड़ी नदी, अधूरे पुल ने खोली विकास की पोल
ज़की हमदम किशनगंज बिहार
किशनगंज: बिहार के किशनगंज जिले के दल्लेगांव पंचायत में आजादी के दशकों बाद भी ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन जीने को मजबूर हैं। इसका ताजा उदाहरण उस समय देखने को मिला जब एक दूल्हे को अपनी बारात लेकर ससुराल पहुंचने के लिए नदी पार करनी पड़ी।
जानकारी के अनुसार, नदी पर पुल का निर्माण वर्षों से अधूरा पड़ा है, जिसके कारण लोगों को आज भी नदी पार करने के लिए नाव और मानव सहारे का सहारा लेना पड़ता है। दूल्हे को पहले नाव के जरिए नदी के गहरे हिस्से तक ले जाया गया, जबकि जहां पानी कम था वहां वह दूसरे व्यक्ति के कंधे पर सवार होकर नदी पार करता नजर आया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दल्लेगांव पंचायत में अधूरे पुल की वजह से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है। बरसात के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से पुल निर्माण पूरा कराने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
दूल्हे के नदी पार करने की तस्वीरें और वीडियो अब इलाके में चर्चा का विषय बने हुए हैं। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब शादी जैसे खुशी के मौके पर भी लोगों को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, तो आखिर विकास के दावे कहां तक सही हैं।
उल्लेखनीय है कि दल्लेगांव पंचायत संघर्ष कमेटी पिछले कई वर्षों से अधूरे पुल निर्माण को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है और विभिन्न माध्यमों से सरकार व प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करती रही है। संगठन के अध्यक्ष मोहम्मद जहुर रज़वी एवं उपाध्यक्ष नदीम सरवर ने नई सरकार से अपील करते हुए कहा कि दल्लेगांव के अधूरे पुल का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कराया जाए, ताकि भविष्य में दूल्हा-दुल्हन, मरीजों, गर्भवती महिलाओं तथा मैयत को नदी पार कराने के लिए नाव और लोगों के कंधों का सहारा न लेना पड़े।
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से जल्द से जल्द पुल निर्माण कार्य पूरा कराने की मांग की है, ताकि लोगों को इस तरह की समस्याओं से स्थायी राहत मिल सके।
