फरक्का जल संधि पर बिहार में सियासी हलचल तेज, दिसंबर 2026 में खत्म हो रही 30 साल की मियाद; जदयू ने उठाई पुनर्विचार की मांग

डेस्क बिहार भागलपुर
3-10-2026
रिपोर्ट संजीव कुमार शर्मा
भागलपुर बिहार

फरक्का जल संधि पर बिहार में सियासी हलचल तेज, दिसंबर 2026 में खत्म हो रही 30 साल की मियाद; जदयू ने उठाई पुनर्विचार की मांग

भागलपुर बिहार के हितों से जुड़े फरक्का जल बंटवारा संधि का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में हुई 30 साल की गंगा जल बंटवारा संधि की समय-सीमा दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है। ऐसे में जनता दल यूनाइटेड ने इस संधि के नवीनीकरण का विरोध करते हुए बिहार के जल अधिकारों की आवाज बुलंद की है। जदयू का आरोप है कि फरक्का बराज और जल संधि के कारण बिहार को बाढ़, जल संकट, सिंचाई और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी मुद्दे पर पार्टी ने राज्य के 12 गंगा तटीय जिलों में ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ अभियान शुरू किया है।
दरअसल, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में वर्ष 1975 में फरक्का बराज का निर्माण किया गया था। इसके बाद गंगा नदी के जल बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में अंतरराष्ट्रीय समझौता हुआ। यह संधि शुष्क मौसम यानी 1 जनवरी से 31 मई तक गंगा के पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है। अब दिसंबर 2026 में इसकी 30 साल की अवधि पूरी होने जा रही है। ऐसे में संधि के भविष्य को लेकर बिहार में बहस तेज हो गई है।
जदयू का दावा है कि फरक्का बराज के कारण गंगा में गाद जमा होने और नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव से बिहार को भारी नुकसान हो रहा है। पार्टी का कहना है कि गंगा के जलस्तर और प्रवाह पर पड़ने वाले प्रभाव से बाढ़ की समस्या गंभीर होती है। वहीं, शुष्क मौसम में पानी के बंटवारे के कारण बिहार की सिंचाई, पेयजल, उद्योग और किसानों की जरूरतें भी प्रभावित होती हैं। जदयू का आरोप है कि इस समझौते में बिहार के हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
इस मुद्दे को लेकर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार आवाज उठाते रहे हैं। पार्टी के मुताबिक, संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में भी यह मामला उठाया गया। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने स्पष्ट रूप से कहा कि मौजूदा संधि बिहार के हित में नहीं है और इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। यदि भविष्य में कोई नया समझौता होता है, तो उसमें वर्ष 2050 तक बिहार की जल जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इसी मांग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जदयू ने ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा गंगा किनारे बसे 12 जिलों में जाकर लोगों से संवाद कर रहे हैं। इनमें बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार शामिल हैं।

जदयू का कहना है कि यह अभियान किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि बिहार के जल अधिकारों और आम लोगों के हितों की लड़ाई है। पार्टी चाहती है कि केंद्र सरकार फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार करे और भविष्य के किसी भी समझौते में बिहार की जरूरतों को उचित स्थान मिले। अब बड़ा सवाल यह है कि दिसंबर 2026 में संधि की अवधि पूरी होने के बाद बिहार के जल हितों को लेकर केंद्र सरकार क्या फैसला लेती है।

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