संवाददाता शुभम कुमार
इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि इस सेमिनार का उद्देश्य राष्ट्रीय आंदोलन के प्रेरणास्रोत के रूप में भगवान बिरसा मुंडा के योगदान तथा आदिवासी समाज को जागरूक बनाने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालना है।
अध्यक्षीय भाषण देते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) संजय कुमार झा ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन एवं कार्यों पर प्रकाश डालते हुए उनसे प्रेरणा लेने की सलाह दी।
मुख्य वक्ता के रूप में टी.एन.बी. कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. रविशंकर चौधरी ने जनजातीय चेतना और स्वतंत्रता संग्राम के महानायक भगवान बिरसा मुंडा के जीवन-वृत्त एवं कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि मात्र 25 वर्ष की अल्पायु में झारखंड के उलिहातू गांव का वह बालक औपनिवेशिक शोषण के विरुद्ध जन-प्रतिरोध का महानायक बन गया। जब ब्रिटिश अधिकारी और स्थानीय जमींदार जनजातीय समाज का शोषण कर रहे थे, तब भगवान बिरसा मुंडा ने सामाजिक और आर्थिक अन्याय के विरुद्ध आवाज़ बुलंद की और लोगों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया। ‘धरती आबा’ के रूप में सम्मानित भगवान बिरसा मुंडा ने 1890 के दशक में ब्रिटिश उत्पीड़न के विरुद्ध ‘उलगुलान’ (मुंडा विद्रोह) का नेतृत्व किया।
सेमिनार को संबोधित करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रजभूषण तिवारी ने कहा कि वर्ष 2021 में भारत सरकार द्वारा 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय एक सराहनीय पहल है।
सेमिनार में छात्र प्रतिनिधि हृषिकेश प्रकाश ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल जनजातीय समाज के ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनका संघर्ष युवाओं को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और सामाजिक चेतना को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में इतिहासबोध और राष्ट्रप्रेम की भावना को सुदृढ़ करते हैं।
धन्यवाद ज्ञापन इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक अक्षय रंजन द्वारा किया गया।
इस अवसर पर मारवाड़ी कॉलेज के अंग्रेज़ी विभाग से डॉ. एस.सी. राय एवं डॉ. अतुल चंद्र घोष, समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. संगीत कुमार एवं डॉ. जूही सिंह, अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार मिश्रा, मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सुपेन्द्र कुमार यादव, भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. अनादि प्रसाद, मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. बिनोद कुमार मंडल, हिंदी विभाग के वरीय शिक्षक डॉ. आलोक रंजन सहित अन्य शिक्षकगण एवं सैकड़ों छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।
