मल्हार महाउत्सव में बड़ी चूक: आमंत्रण कार्ड से पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी का नाम गायब, जिम्मेदार कौन 

मल्हार महाउत्सव में बड़ी चूक: आमंत्रण कार्ड से पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी का नाम गायब, जिम्मेदार कौन

प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही पर उठे सवाल…

मस्तूरी- नगर पंचायत मल्हार में आयोजित होने वाले मल्हार महाउत्सव को लेकर विवाद अब गहराता जा रहा है। मस्तूरी भाजपा के पूर्व विधायक पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्री डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी का आमंत्रण कार्ड से गायब होने पर भाजपा कार्यकर्ता समर्थकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और समर्थकों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय जनप्रतिनिधि रहे वरिष्ठ नेता की अनदेखी केवल एक सामान्य भूल नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। आमंत्रण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज में इस तरह की चूक आयोजन की पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर प्रश्नचिन्ह लगाती है।
मामले ने तूल तब पकड़ा जब समर्थकों ने खुलकर नाराजगी जाहिर की और इसे अधिकारियों की बड़ी लापरवाही बताया। उनका आरोप है कि कार्यक्रम की तैयारी और अतिथि सूची तैयार करने में किसकी भूमिका रहा होगा यह गंभीरता नहीं बरती गई, जिसके चलते एक प्रमुख और प्रभावशाली नेता का नाम ही शामिल नहीं किया गया। गौरतलब है कि डॉक्टर कृष्णमूर्ति बांधी वर्तमान में मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में विधायक के रूप में सक्रिय नेता माने जाते थे अपने मंत्री कार्यकाल के दौरान उन्होंने मल्हार को नगर पंचायत को दर्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी इतना ही नहीं मल्हार महोत्सव की शुरुआत करने में भी बहुत श्रेय रहा हैऔर क्षेत्र मे महत्वपूर्ण नेता माना जाता है ऐसे में जिस नेता का इस आयोजन में ऐतिहासिक और विकासात्मक जुड़ाव रहा हो उन्हें ही आमंत्रण से बाहर रखना समर्थन के बीच में गहरा रोषव्याप्त पैदा कर रहा है वही इस पूरे घटनाक्रम में मल्हार क्षेत्र में भाजपा के भीतर चल रही गेंदबाजी को भी उजागर कर दिया है राजनीतिक जानकारों को मानना है कि इस तरह की घटनाएं पार्टी अंदरूनी मत भेदो सामने लाती है और उसका असर भविष्य की राजनीति पर भी पढ़ सकते हैं महोत्सव का आयोजन प्रशासनिक अधिकारी के मार्गदर्शन एवं निगरानी में किया जा रहा है इसमें वर्तमान पदस्थ जनप्रतिनिधि को प्राथमिकता दी गई है हालांकि इस निर्णय और लापरवाही के चलते समर्थकों में असंतोष का माहौल बन गया है अब बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी महोत्सव में किसकी जिम्मेदारी थी कि स्थानीय नेता का नामों निशान मिटाने मे रहा योगदान क्यों और कैसे ?
प्रशासनिक कार्य है तो किसकी भूमिका से हो रहे है मतभेद आखिर जिम्मेदार कौन है ?
क्या संबंधित अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी या मामला केवल चर्चा पर ही सीमित रह जाएगा फिलहाल मल्हार महोत्सव से पहले ही यह मुद्दा क्षेत्र में सियासी हलचल मुद्दा बन चुका था

रिपोर्टर महेंद्र सिंह राय

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