पूर्व रेलवे ने मालदा और आसनसोल मंडलों में यात्रियों की सुगम यात्रा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मनसून-पूर्व तैयारियों को तेज किया
कोलकाता, 18 जून, 2026:
रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/बिहार
एक समय था जब मानसून के आगमन के साथ ही दैनिक यात्रियों के मन में चिंता की लहर दौड़ जाती थी। भारी बारिश के कारण जल निकासी की व्यवस्था बाधित हो जाती थी, जिससे पटरियों पर पानी भर जाता था, ट्रेनें देर से चलती थीं और प्लेटफॉर्म कीचड़ से भर जाते थे, जिससे रोज़मर्रा की यात्रा थकाऊ और कष्टदायक हो जाती थी। हालाँकि, मानसून की उन लगातार परेशानियों के दिन अब तेज़ी से अतीत की बात बनते जा रहे हैं। केवल समस्या आने पर प्रतिक्रिया देने के बजाय, पूर्व रेलवे ने मज़बूत और पहले से तैयारी करने की संस्कृति अपनाई है। इसमें क्षेत्र में पहली भारी बारिश होने से काफी पहले ही यात्रियों की सुविधा और पूर्ण सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक श्री मिलिंद देऊस्कर के गतिशील नेतृत्व में एक व्यापक बहु-मंडलीय रणनीति सफलतापूर्वक लागू की गई है। मालदा और आसनसोल जैसे प्रमुख मंडलों में सुरक्षा ऑडिट, गहन स्वच्छता अभियान और चौबीसों घंटे निगरानी व्यवस्था स्थापित की गई है, ताकि मानसून के दौरान रेल परिचालन प्रभावित न हो।
मालदा मंडल ने महत्वपूर्ण रेल अवसंरचना की सुरक्षा के लिए मानसून-पूर्व कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल की पूर्णता का औपचारिक प्रमाणन कर दिया है। सभी संवेदनशील रेल खंडों पर रात्रिकालीन मानसून गश्त के लिए अनुमोदित चार्ट तथा नामित टीमें तैनात की गई हैं, जिन्हें आवश्यक रात्रि उपकरण एवं उपभोग्य सामग्री उपलब्ध कराई गई है। 1 जून, 2026 से महत्वपूर्ण पुलों और ट्रैक स्थलों पर स्थायी एवं मोबाइल चौकीदार सक्रिय रूप से तैनात किए गए हैं। आपातकालीन परिस्थितियों से त्वरित निपटने के लिए बोल्डर, बालू, खदान की धूल, कोयले की राख, रिलीविंग गर्डर तथा सीसी क्रिब जैसी सामग्रियों का विशाल भंडार निर्धारित स्थानों पर रखा गया है। साथ ही, तत्काल लोडिंग के लिए खाली वैगनों की व्यवस्था पहले से कर ली गई है। इसके अतिरिक्त, बड़ी संख्या में बालू से भरे बोरे (सैंडबैग) रणनीतिक स्थानों पर त्वरित उपयोग के लिए रखे गए हैं। संरचनात्मक सुरक्षा के तहत पहाड़ी कटिंग क्षेत्रों से ढीले पत्थरों को हटाया गया है तथा सभी कैच-वॉटर, साइड और यार्ड ड्रेनों की पूरी तरह से गाद निकासी (डिसिल्टिंग) की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र के साथ मजबूत समन्वय स्थापित किया गया है, जिससे तेज हवाओं और भारी वर्षा की वास्तविक समय (रियल-टाइम) चेतावनियां प्राप्त हो सकें। साथ ही, राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षणों के माध्यम से बांधों से अतिरिक्त जल छोड़े जाने की स्थिति पर सतत निगरानी रखी जा रही है, ताकि समय रहते आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा सकें।
इसी के साथ, आसनसोल मंडल ने पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन विभाग के नेतृत्व में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाकर मौसमी चुनौतियों का सामना किया है। आसनसोल, अंडाल और दुर्गापुर स्टील जैसी बड़ी रेलवे कॉलोनियों के साथ-साथ दुबराजपुर, कुमारधुबी, चिनपई, दुर्गापुर, रानीगंज, जसीडीह और मधुपुर स्टेशन कॉलोनियों में आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर नालों की सफाई का कार्य सक्रिय रूप से किया जा रहा है। 8 जून से 10 जून, 2026 तक तीन दिवसीय उच्च-तीव्रता अभियान चलाया गया, जिसका उद्देश्य गाद, कचरा और जमे हुए पानी को हटाकर जल निकासी को सुचारु बनाना, जलभराव रोकना तथा मलेरिया और डेंगू जैसी वाहक-जनित बीमारियों की रोकथाम करना था।
इस सफाई अभियान को पूरे मंडल क्षेत्र में प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए दैनिक कार्यक्रम के अनुसार क्रियान्वित किया गया। 8 जून को आसनसोल, अंडाल, रानीगंज, मधुपुर, जसीडीह, दुर्गापुर, उखड़ा, दुमका और सीतारामपुर में अभियान चलाया गया। 9 जून को पानागढ़, चित्तरंजन, कुल्टी, सीतारामपुर, सिउड़ी, आसनसोल कॉलोनी, मधुपुर, जामताड़ा, देवघर, अंडाल, दुमका कॉलोनी और रानीगंज में कार्य किया गया। अंतिम दिन,10 जून को सिउड़ी, अंडाल, बराकर, उखड़ा, दुर्गापुर, सीतारामपुर, गिरिडीह, मधुपुर, कुमारधुबी, रानीगंज, पानागढ़, मनकर और आसनसोल में गहन गतिविधियों के साथ अभियान संपन्न हुआ। पूरे अभियान के दौरान ईएनएचएम अधिकारी एवं फील्ड स्टाफ स्टेशन परिसरों, सर्कुलेटिंग क्षेत्रों, सेवा भवनों और आवासीय कॉलोनियों में स्वयं उपस्थित रहकर कार्यों की निगरानी करते रहे।
मालदा मंडल की संरचनात्मक इंजीनियरिंग आधारित सावधानियों और आसनसोल मंडल की गहन स्वच्छता योजनाओं को एक साथ लागू करते हुए पूर्व रेलवे सुरक्षित, स्वच्छ और भरोसेमंद रेल यात्राएं सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इन प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री शिबराम माझि ने कहा: “हमारी टीमों ने ज़मीनी स्तर पर अथक परिश्रम किया है ताकि मानसून के दौरान होने वाली बाधाओं का केवल प्रबंधन करने के बजाय उन्हें पूरी तरह रोकने की दिशा में कार्य किया जा सके। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्रियों को पूरे वर्षा ऋतु में सुरक्षित, स्वच्छ और समयनिष्ठ यात्रा का अनुभव प्राप्त हो।”
