कटिहार:बिहार में जमीन खरीदना हुआ महंगा: नई MVR दरें लागू, रजिस्ट्री पर बढ़ेगा खर्च; ग्रामीण क्षेत्रों में 60% तक बढ़ोतरी, महिलाओं को मिलेगी छूट

कटिहार:बिहार में जमीन खरीदना हुआ महंगा: नई MVR दरें लागू, रजिस्ट्री पर बढ़ेगा खर्च; ग्रामीण क्षेत्रों में 60% तक बढ़ोतरी, महिलाओं को मिलेगी छूट

संवाददाता मनोज कुमार कटिहार/बिहार

बिहार में जमीन खरीदने और उसकी रजिस्ट्री कराने वालों को अब पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने भूमि के न्यूनतम मूल्य रजिस्टर (एमवीआर) और स्टांप शुल्क की नई दरें लागू कर दी हैं।
नई व्यवस्था के तहत राज्यभर में जमीन की सरकारी कीमतों में बड़ा बदलाव किया गया है। इसका सीधा असर जमीन, प्लॉट और फ्लैट की खरीद-बिक्री पर पड़ेगा।
कटिहार जिले में भी नई एमवीआर दरें प्रभावी हो गई हैं। जिला अवर निबंधन पदाधिकारी अजय कुमार ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश पर भूमि के न्यूनतम मूल्य रजिस्टर का पुनरीक्षण किया गया है।
नई दरों के आधार पर अब जमीन का सरकारी मूल्य तय होगा और इसी मूल्य के अनुसार रजिस्ट्री शुल्क एवं अन्य शुल्क की गणना की जाएगी।

शहरी क्षेत्र-नगर निकाय से सटे इलाकों में सबसे ज्यादा असर

नई व्यवस्था के तहत शहरी क्षेत्रों और नगर निकायों से सटे इलाकों में जमीन की सरकारी कीमतों में सबसे अधिक बढ़ोतरी की गई है। यहां एमवीआर को लगभग दोगुना कर दिया गया है। यानी जिस जमीन का सरकारी मूल्य पहले किसी निश्चित राशि के आधार पर तय होता था, अब उसका मूल्यांकन लगभग दोगुने आधार पर किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार शहरों के आसपास तेजी से बढ़ रहे जमीन के बाजार मूल्य को देखते हुए यह बदलाव किया गया है। नगर क्षेत्र से सटे इलाकों में जमीन की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण बाजार मूल्य और सरकारी मूल्य में अंतर को कम करने के उद्देश्य से एमवीआर में संशोधन किया गया है।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी जमीन की सरकारी कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। ग्रामीण इलाकों में एमवीआर में करीब 60 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। इससे गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री करने वाले लोगों को भी अब अधिक शुल्क देना होगा।

उदाहरण से समझें, कैसे बढ़ेगा रजिस्ट्री का खर्च

नई दर लागू होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री कराने वालों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। उदाहरण के तौर पर अगर किसी जमीन का सरकारी मूल्य पहले 5 लाख रुपये प्रति कट्ठा था, तो अब उसी जमीन की रजिस्ट्री 10 लाख रुपये प्रति कट्ठा के मूल्यांकन के आधार पर होगी।
इसका मतलब है कि जमीन की कीमत के साथ-साथ स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क की राशि भी बढ़ जाएगी। जमीन खरीदने वाले व्यक्ति को अब पहले की तुलना में ज्यादा राशि की व्यवस्था करनी होगी।
अधिकारियों का कहना है कि रजिस्ट्री के समय जमीन का मूल्य बाजार दर और सरकारी तय दर में जो अधिक होगा, उसी आधार पर शुल्क की गणना की जाती है। नई एमवीआर दर लागू होने से सरकारी मूल्यांकन बढ़ जाएगा।

स्टांप शुल्क भी बढ़ा, सामान्य खरीदारों पर पड़ेगा असर

भूमि निबंधन में सिर्फ एमवीआर ही नहीं, बल्कि स्टांप शुल्क में भी बदलाव किया गया है। सामान्य श्रेणी के खरीदारों के लिए स्टांप शुल्क की दर 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दी गई है।
यानी अब जमीन की रजिस्ट्री कराने में स्टांप शुल्क के रूप में भी अधिक भुगतान करना होगा। इसके अलावा निबंधन शुल्क समेत अन्य शुल्क भी नई दरों के अनुसार तय होंगे।
जिला अवर निबंधन पदाधिकारी अजय कुमार ने बताया कि नई व्यवस्था सरकार के निर्देश के अनुसार लागू की गई है। सभी निबंधन कार्यालयों में नई दरों के आधार पर ही जमीन की रजिस्ट्री की जा रही है।

महिलाओं को मिलने वाली छूट पहले की तरह जारी

सरकार ने महिलाओं को दी जाने वाली विशेष राहत को बरकरार रखा है। महिला खरीदारों को स्टांप शुल्क में 0.4 प्रतिशत और निबंधन शुल्क में 0.1 प्रतिशत की छूट पहले की तरह मिलती रहेगी।
इससे महिला के नाम पर जमीन खरीदने वालों को कुछ राहत मिलेगी। सरकार की ओर से महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए यह सुविधा जारी रखी गई है।

हर साल 5% बढ़ेगा एमवीआर, तीन साल में होगा बड़ा पुनरीक्षण

नई व्यवस्था में भविष्य के लिए भी जमीन के सरकारी मूल्य निर्धारण को लेकर नियम तय किए गए हैं। इसके तहत अब प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एमवीआर में 5 प्रतिशत की नियमित वृद्धि की जाएगी।
इसके अलावा हर तीन साल में भूमि मूल्य का व्यापक पुनरीक्षण किया जाएगा। इससे जमीन के सरकारी मूल्य को बाजार की स्थिति के अनुसार अपडेट किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप सरकारी मूल्यांकन हो सकेगा। साथ ही इससे राजस्व संग्रह में भी बढ़ोतरी होगी।

रजिस्ट्री कराने वालों ने कहा- बढ़ेगा खर्च

नई दरें लागू होने के बाद जमीन खरीदने वाले लोगों में खर्च बढ़ने को लेकर चिंता है। लोगों का कहना है कि पहले ही जमीन की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं, ऐसे में एमवीआर और स्टांप शुल्क बढ़ने से आम खरीदारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा।
वहीं प्रशासन का कहना है कि नई दरें पारदर्शी व्यवस्था बनाने और सरकारी रिकॉर्ड में जमीन के वास्तविक मूल्य को दर्शाने के लिए लागू की गई हैं।

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