मनरेगा योजना में भारी लूट की गंध।
मुखिया और PRS द्वारा चलाए गए योजना का एक भी नामांकित बोर्ड नहीं। ना तो योजना की जानकारी ना ही योजना में लगी राशि की कोई जानकारी।
रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/बिहार
भागलपुर जिला अंतर्गत सुल्तानगंज प्रखंड के अशियाचक पंचायत में जांच टीम लीडर संजीव कुमार द्वारा आम सभा के दरब्यान एक भी योजना के बारे में नहीं बताया गया। और ना ही योजना से संबंधित ,राशि की जानकारी दी गई । और ना ही तो किसी योजना के विषय में जांच हुआ, ना ही तो पढ़ कर पब्लिक को बताया गया। इस सभा की मुख्य बात यह रही कि जब टीम लीडर संजीव कुमार से पूछा गया कि आपके द्वारा किस-किस योजना का जांच किया गया। तो टीम लीडर संजीव कुमार भागते नजर आए। वही PRS के द्वारा एक योजना को स्थल पर दिखाया गया जिसमें बताया गया कि बांध के किनारे मिट्टी भराई का काम किया गया है। जिसमें लगभग 9 लाख कुछ रुपए का लागत आई है।लेकिन स्थल पर योजना संबंधी कोई भी नामांकित बोर्ड नहीं देखा गया। PRS से पूछा गया कि योजना का बोर्ड कहां है। तो उनके द्वारा जवाब आया की बाढ़ में बह गया होगा या भैंस द्वारा अलगा दिया गया हो।, आश्चर्य की बात यह है मनरेगा की योजना का बोर्ड भैंस अलगा देती है ।बाढ़ के पानी में बह जाता है और बिहार में पुल हवा के झोंकों से गिर जाता है। यही है विकास पुरुष की विकास की कहानी, जब मुखिया जी से पूछा गया कि मनरेगा द्वारा चलाये गए योजनाओं की जानकारी दें तो उनके द्वारा भी कहा गया कि हमारे पंचायत में कुल 40 योजना वृक्षा रोपण का चला है और अन्य 38 योजना चल रहा कुल मिलाकर क्या 78 योजना चला है।पोखर की खुदाई और अन्य योजनाएं चलाई गई लेकिन मुखिया ने ऑन कैमरा कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। बड़ी विचित्र बात है। जो योजना सरकार के पैसे से चला, जांच टीम द्वारा जांच कर आम सभा में पब्लिक को जानकारी देनी थी लेकिन पब्लिक के टैक्स के पैसे से पंचायत के लोगों के विकास के लिए चला योजना है। सरकार के गाइड लाइंस के अनुसार योजना का पूर्ण विवरण और जानकारी आम जनता को देनी चाहिए थी। जबकि इस योजना की जानकारी देने के लिए ही आम सभा की बैठक होती है ।
तो उसे बैठक में मुश्किल से पूर्व पंचायत से 25 या 50 लोग इकट्ठा होकर कगजी कार्रवाई करके खाना पूर्ति कर लेते हैं । और किसी योजना का विवरण या जानकारी जांच टीम द्वारा आम जनता को नहीं दी जाती है । तो फिर जांच टीम जांच क्या करती है । यह जांच टीम पर भी गंभीर सवाल है । जांच टीम के मुख्य टीम लीडर भी इसके विषय में कुछ भी बोलने से बचते नजर आते हैं । इस तरह की बात यह बताता है कि जांच टीम के द्वारा भी हुई घोटाले को छुपाया जा रहा है। आखिर यह किस प्रकार का जांच है। जो जांच टीम 6 दिन तक जनता के पैसे से पंचायत में रहती है । पंचायत के कार्यों का विवरण लेखा-जोखा देखती है ।और आमसभा में जब टीम लीडर द्वारा योजना की जानकारी देने की बात होती है। तो एक भी योजना की जानकारियां नहीं दिया गया है। यह किस प्रकार का जांच है। जांच को किया सिर्फ मान लिया जा सकता है। बिहार सरकार के सभी योजनाओं में वृहद पैमाने पर लूट मची हुई है ।आखिर इस लूट का जिम्मेदार कौन है। जनता या जन प्रतिनिधि। आखिर टीम लीडर के द्वारा मनरेगा की चली योजना का पूर्ण विवरण पंचायत सरकार भवन में प्रस्तुत क्यों नहीं क्या गया ? यह सवाल हम आप लोगों के ऊपर छोड़ते हैं।इस खबर पर कमेंट में जरूर अपनी राय लिखें क्या होना चाहिए!
