सरकारी भतोखर पोखर पर अवैध कब्जे का आरोप, ग्रामीणों ने डीएम से जांच व कार्रवाई की मांग
रिपोर्ट संजीव कुमार शर्मा भागलपुर बिहार
भागलपुर। जगदीशपुर प्रखंड के सैनों मौजा स्थित सरकारी गैरमजरूआ भतोखर पोखर पर कथित अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन की खरीद-बिक्री का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को आवेदन सौंपकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
आवेदन में कहा गया है कि मौजा सैनों, थाना संख्या-429, खाता संख्या-261 एवं खेसरा संख्या-633, 634 और 635 में दर्ज भतोखर पोखर वर्षों से सरकारी गैरमजरूआ तालाब के रूप में दर्ज है। जिला मत्स्य पदाधिकारी की जलकर बंदोबस्ती सूची में भी यह पोखर शामिल है तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 तक इसका राजस्व सरकार के खाते में जमा होने का दावा किया गया है।
आवेदनकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि वर्ष 1966-67 के रिविजनल सर्वे खतियान में उक्त भूमि पोखर के रूप में दर्ज होने के बावजूद अभिलेखों में कथित छेड़छाड़ कर निजी रैयती खाता तैयार किया गया और बाद में केवाला के माध्यम से इसकी खरीद-बिक्री कर दी गई। उनका कहना है कि बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 लागू होने के बाद सरकारी गैरमजरूआ तालाब की बिक्री का कोई कानूनी आधार नहीं बनता।
आवेदन में वर्ष 1950 के न्यायालय के आदेश, कस्टोडियल सर्वे खतियान, रिविजनल सर्वे अभिलेख तथा वर्ष 1979 में अंचलाधिकारी द्वारा पोखर में मछली पकड़ने के मामले में की गई कार्रवाई का भी हवाला देते हुए दावा किया गया है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि भतोखर पोखर सरकारी संपत्ति है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बांका जिले के रजौन थाना क्षेत्र निवासी लक्ष्मण पासवान ने वर्ष 2005 में कई केवाला के माध्यम से उक्त भूमि खरीदी, जबकि विक्रेताओं के पास सरकारी तालाब पर स्वामित्व का कोई वैध दस्तावेज नहीं था। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि खरीद-बिक्री के दस्तावेजों में पोखर की भूमि को छिपाकर ‘चौरमय’ दर्शाया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले की शिकायत वर्ष 2017 में अंचलाधिकारी समेत अन्य अधिकारियों से भी की गई थी तथा प्रधानमंत्री कार्यालय को भी आवेदन भेजा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
आवेदन के माध्यम से जिलाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर सरकारी भतोखर पोखर को अतिक्रमण और अवैध कब्जे से मुक्त कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पोखर क्षेत्र के किसानों की सिंचाई का प्रमुख स्रोत है और इसके संरक्षण से किसानों को लाभ मिलेगा।
